जानलेवा हमले के आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर पुलिस का फूंका पुतला
अमर उजाला ब्यूरो
नारायणगढ़।
लगभग एक महीने पहले राज्यमंत्री के कार्यालय के पास तीन युवकों पर खनन माफिया के लोगों द्वारा किए गए जानलेवा हमले में दर्ज मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी न होने पर पीड़ितों के परिजनों और क्षेत्रवासियों ने पुलिस प्रशासन का पुतला फूंका। इससे पहले नारायणगढ़ थाने के समक्ष इन सभी ने रविवार को धरना भी दिया। रविवार को थाना प्रभारी सुरेश पाल के साथ-साथ यमुनानगर डिटेक्टिव ब्रांच की टीम भी धरना स्थल पर पहुंची। पीड़ित पक्ष का कहना था कि 35 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस प्रशासन अभी तक किसी न किसी बहाने इस केस में की जाने वाली कार्रवाई को लटका रहा है। रविवार को धरना स्थल से लोग रोष मार्च के रूप में क्षेत्र के विभिन्न बाजारों से होकर निकले। इस दौरान लोगों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी भी की। इन सभी ने अग्रसेन चौक पर पुलिस प्रशासन का पुतला भी फूंका।
उल्लेखनीय है कि बीते 12 फरवरी की देर शाम शहर के पंजलासा चौक के पास स्थित राज्यमंत्री के कार्यालय के ठीक सामने एक दुकान में बैठे तीन युवकों पर दर्जनभर हथियारबंद लोगों ने हमला कर दिया था। खनन माफिया से जुड़े इन लोगों द्वारा किए गए इस हमले में तीनों युवकों मनु शर्मा, तेजेंद्र और रोहित धीमान बुरी तरह घायल हो गए थे। इस संदर्भ में पुलिस ने दर्जन भर लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। जांच में कोताही बरतने के नाम पर एक एसआई को निलंबित भी किया जा चुका है। परिजनों व क्षेत्रवासियों की मांग पर सीआईए को भी मामले की जांच का जिम्मा सौंप दिया गया, जबकि जांच बाद में स्टेट क्राइम के हवाले कर दी गई थी। इसी के विरोध में परिजनों सहित लोगों ने 27 फरवरी को भी पुलिस थाना के समक्ष धरना दिया था। इस दौरान मदन चानना, अमरीक सिंह रज्जूमाजरा, रजनीश शर्मा, जगमाल सिंह रौलों, हरबिलास, नैब सिंह फिरोजपुर, शिविश वशिष्ठ, जसविंद्र सिंह, निर्मल सिंह, सुनील शर्मा भेड़ो, रजत शर्मा, रोहित धीमान, मुलखराज रसौर, हमीर सिंह, मित्ता वालिया, मनोज अग्रवाल, जतिन छाबड़ा, मनीष सैनी, श्याम लाल धीमान, अमित अग्रवाल, राजवीर गुज्जर, अवनीश राणा, रज्जाक वासलपुर, वजीरा बरौली आदि मौजूद रहे।
वहीं मामले में नारायणगढ़ थाना प्रभारी सुरेश पाल के अनुसार जांच कर रही टीम ने पीड़ित पक्ष से एक्सरे की कॉपी मांगी, जोकि पीड़ित पक्ष जांच टीम को उपलब्ध नहीं करवा सका। मामले की जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे उस पर नियम अनुसार कार्रवाई होगी।