माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। दिल्ली कूच करने के दूसरे दिन बुधवार को शंभू बॉर्डर पर पंजाब की तरफ से किसान पूरी तैयारी के साथ मोर्चे पर उतरे। सुबह 10 बजे से आंदोलनकारी किसान बार-बार सीमा पर उग्र हो रहे थे। वहीं हरियाणा पुलिस की तरफ से एक दो बार आंसू गैस के गोले दागे गए। हरियाणा पुलिस मंगलवार की तुलना में बुधवार सुबह कम आक्रामक दिख रही थी।
जैसे ही आंदोलनकारी किसान समय बीतने के साथ एकत्रित होने लगे तो पुलिस को भी लग गया कि अब दोबारा से टकराव हो सकता है। हुआ भी ठीक ऐसा ही। दोपहर 12 बजे पूरी तैयारियों के साथ मुंह पर मुल्तानी मिट्टी का लेप, आंखों पर चश्मे, पीपीई किट और आंसू गैस के गोलों से बचने को पानी में भिगाई हुई बोरियों के साथ आंदोलनकारी सीमा पर डट गए। यहां पर भीड़ बढ़ती देख हरियाणा पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागने शुरू कर दिया।
गोलों को प्रदर्शनकारी किसान बोरी से ढकते दिख रहे थे। प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने घग्गर के पुल से आगे नहीं बढ़ने दिया। एक बजे के बाद प्रदर्शनकारियों ने बड़े-बड़े टैंकरों का मंगा लिया और स्प्रिंकलर की मदद से आंसू गैस के धुएं पर पानी की बौछारों से छिड़काव करने लगे। इतना ही नहीं एक किसान घग्गर के पास पहुंचकर पुलिस फोर्स भी पानी की बौछार करता दिखाई दिया।
यहीं पर कुछ किसान पतंग उड़ा रहे थे। हैरानी तो तब हुई जब किसानों ने आंसू गैस को पुलिस की तरफ धकेलने के लिए बड़े-बड़े पंखों का प्रयोग शुरू कर दिया। इससे मंगलवार के मुकाबले सीमा पर टिकने का प्रदर्शनकारियों को अधिक समय मिला। इसके बाद करीब ढाई बजे पुलिस ने अपने आंसू गैस के गोले दागने वाले ड्रोन का प्रयोग किया, मगर यहां सभी को यह देखकर हैरानी हुई कि प्रदर्शनकारियों ने अपनी पतंगाें से कई बार ड्रोन पर हमला किया और अंत में ड्रोन को पीछे हटना पड़ा।
यहां तक प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव जारी रहा। बॉडी प्रोटेक्टर से लैस प्रदर्शनकारी अधिक समय तक डटे रहे। वहीं इस दौरान करीब सात प्रदर्शनकारियों के घायल होने की सूचना मिली। दोपहर को साढ़े तीन बजे एक बार फिर संघर्ष रुक गया। मगर कुछ देर बार ही फिर से संघर्ष शुरू हो गया और आंसू गैस के गोल पुलिस ने दागने शुरू कर दिए। सायं सात बजे तक रुक-रुककर आंसू गैस के गोलों के धमाके होते रहे। लिहाजा बुधवार को भी हरियाणा पुलिस प्रदर्शनकारियों पर भारी रही, मगर किसानों ने भी बराबर की टक्कर दी।