अंबाला। चार दिवसीय छठ पूजा का उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही सोमवार को समापन हो गया। व्रती महिलाओं ने सूर्य की पहली किरण के साथ अर्घ्य दिया और अपना 36 घंटे का व्रत पूरा किया। कृत्रिम घाट पर सुबह से ही व्रतियों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। सुबह हल्की ठंड होने के बावजूद महिलाएं पानी में कई घंटों तक खड़ी रहीं। आस्था की गरमाहट इस हल्की ठंड पर भारी पड़ गई। लगभग साढ़े तीन घंटे के इंतजार के बाद छठ व्रती ने भगवान सूर्य देव को अर्घ्य दिया।
सुबह सूर्योदय हुआ तो पानी में खड़े श्रद्धालुओं के चेहरों पर लालिमा बिखर गई। सूर्य को अर्घ्य दिया, फिर कलश और वेदी का विसर्जन कर व्रत पूरा हुआ। आशीर्वाद और प्रसाद का दौर अर्घ्य देने के बाद घाट पर किया गया और बड़ों से आशीर्वाद लेने का सिलसिला शुरू हुआ। महिलाओं ने सूर्य देव और छठी मैया से मनोकामना पूर्ति हेतु प्रार्थना की। छठ व्रतियों ने 36 घंटे का निर्जला व्रत छठ माता का प्रसाद खाकर पूरा किया। पानी से बाहर निकलकर महिलाओं ने एक-दूसरे की मांग में सिंदूर लगाकर सुहाग देने की परंपरा निभाई। मान्यता है कि जितना लंबा सिंदूर होगा उतनी ही लंबी पति की आयु होगी।