अंबाला। कुछ ऐसा करें कि जिंदगी के साथ भी और जिंदगी के बाद भी। आखें देखती रहे और दिल धड़कता रहे। यह तभी संभव है जब लोग नेत्र, अंग और देहदान का संकल्प लें। इसी सोच के साथ अंबाला की सक्षम संस्था और माधव नेत्र बैंक मिलकर काम कर रहे हैं।
इन दोनों संस्थाओं ने समाज को अंगदान के लिए जागरूक करने का बीड़ा उठाया है। करीब 15 साल पहले अंबाला में अंगदान के लिए सक्रिय हुई यह संस्था अब तक करीब 300 लोगों को नेत्रदान, 200 लोगों से देहदान का संकल्प करा चुकी है। इसके अलावा कई बार मौत के बाद वे नेत्रदान कराने में भी अहम भूमिका निभाती है। इतना ही नहीं दुर्गा नगर और ओमैक्स सिटी में रहने वाले दो परिवारों ने भी सक्षम संस्था के जरिये बेटियों की सड़क हादसों में मौत के बाद अंग दान करने का निर्णय लिया था। यही कारण है कि उनकी बेटियों के अंग आज भी दूसरों के लिए उजाला कर रहे हैं।
कार्यक्रमों से करते हैं अंगदान के लिए जागरूक
सक्षम संस्था अंगदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर संभव प्रयास करती है। इतना ही नहीं, मृत्यु के बाद क्रियाओं में भी जाकर कुछ समय लेती है और वहां पर लोगों को जागरूक करती है। इसके अलावा कई भी कोई बड़े धार्मिक कार्यक्रम होते हैं तो वहां जाकर अपने बैनरों से लोगों से संकल्प दिलाते हैं।
आंखें बचाने के लिए भी सदस्य हो रहे सक्षम
अंगदान ही नहीं, बल्कि सक्षम संस्था की ओर से समय-समय पर स्कूलों और कॉलेजों में जाकर युवाओं की आंखों की जांच कराती है और उन्हें निशुल्क दवएं और चश्मे उपलब्ध कराती है। पिछले एक साल में अभी तक वह करीब 30 हजार बच्चों की कैंप में आंखों की जांच कर चुकी है। इसमें सरकारी और निजी स्कूलों के बच्चे भी शामिल हैं। यहां तक कि उम्रदराज की भी आंखों की जांच कर मोतिया बिंद के ऑपरेशन करा चुकी है। उनका मकसद है कि आंखें लेने की जरूरत ही न पड़े। इसके लिए वह शुरुआती चरण में भी इन्हें खराब होने से बचाया जा सके।
15 सदस्य से शुरू हुआ कारवां, अब 100 पर पहुंचा
सक्षम संस्था अंगदान के लिए करीब 15 साल से सक्रिय होकर काम कर रही है। सक्षम हरियाणा प्रधान नरेंद्र बत्तरा, उपप्रधान केएल गुलाटी, अंबाला जिला के प्रधान भीम सैन भल्ला, उपप्रधान किरन छिब्बड़, कोषाध्यक्ष रवि पुरी, सचिव कृष्ण सैनी और सक्षम के प्रकल्प प्रमुख एसडीओ सिंचाई विभाग के रिटायर्ड नरेश चोपड़ा ने बताया कि पहले महज 15 सदस्य सक्रिय थे। धीरे-धीरे लोगों का साथ मिला और कारवां बढ़ता गया। जो अब 100 सदस्यों तक पहुंच गया है। जागरूकता का असर इस कद्र देखने को मिलता है कि करीब दो साल पहले ही उनके पास सिटी दुर्गा नगर के श्मशान से फोन आया था कि वो मृतक व्यक्ति की आंखें दान करना चाहते हैं। ऐसे में तुरंत सक्षम टीम डॉक्टर संग मौके पर पहुंची और सुरक्षित आंखें निकालने के बाद उसे पीजीआई चंडीगढ़ तक पहुंचाया। वो आज किसी ओर के काम आ रही है।