अंबाला। कैंसर केयर केंद्र की एक माह से दोनों ऑपरेशन थिएटर यानी ओटी में बिजली फाल्ट के कारण बिगड़ी व्यवस्था पटरी पर लौट आई है। कैंसर मरीजों के अस्पताल में होने वाले ऑपरेशनों में रफ्तार मिलेगी। साथ ही ओटी नहीं चलने पर गंभीर मरीजों को पीजीआई रेफर नहीं होना होगा।
सोमवार को डॉक्टरों ने दूसरे ऑपरेशन थिएटर के चलने पर करीब सात माह पहले आई 4-के टेक्नोलॉजी वाली हाईटेक लेप्रोस्कोपी मशीन की भी शुरुआत की। इस मशीन से पहली बार ग्रेस्ट्रोसर्जन डॉ. जितेंद्र चौहान और उनकी टीम ने अंबाला कैंट के 52 वर्षीय राममूर्ति के पित्त की थैली से गांठ निकाली। दो घंटे चले ऑपरेशन के बाद मरीज की तबीयत में सुधार है।
दरअसल, यह हाईटेक मशीन करीब 90 लाख रुपये की लागत से खरीदी थी। प्रदेश के किसी भी नागरिक अस्पताल में यह मशीन नहीं है। डॉक्टरों की ट्रेनिंग और फिर एक माह से बिजली फाल्ट के चलते इस मशीन की शुरूआत ही नहीं हो पा रही थी। अमर उजाला ने बिजली फाल्ट से दो ऑपरेशन थिएटर की बिजली गुल के समाचार और सात माह बाद भी लेप्रोस्कॉपी मशीन चालू करने के समाचार को छह सितंबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
साथ ही इस बिजली फाल्ट के ठीक न होने पर ओटी की सी-आर्म मशीन भी खराब हो गई थी। ऐसे में दूसरी मशीनों के खराब होने का खतरा मंडरा रहा था। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने संज्ञान लेते हुए इसे दुरुस्त करवाया।
ऑपरेशन में नहीं करनी पड़ी ज्यादा चीरफाड़
4-के टेक्नोलॉजी वाली हाईटेक लेप्रोस्कोपी मशीन की खास बात यह है कि इस मशीन में कम चीरफाड़ के बुजुर्ग का ऑपरेशन हुआ। हालांकि अभी निकाली गई गांठ को जांच के लिए भेजा है कि यह कैंसर तो नहीं है। इस ऑपरेशन को मशीन में लगे एचडी कैमरे के जरिए पूरा रिकॉर्ड भी किया गया है, जिससे कि मेडिकल के छात्रों को ऑपरेशन के बारे में बताना पड़े तो वह रिकॉर्डिंग देख सके। साथ ही ऑपरेशन की वीडियो को पैन ड्राइव में डालकर किसी भी दूसरे डॉक्टर के साथ शेयर कर सकते हैं। इस मशीन को चलाने के लिए ग्रेस्ट्रो सर्जन डॉ. जितेंद्र चौहान अहमदाबाद, गुजरात और चंडीगढ़ से ट्रेनिंग करके आए है।
वर्जन
कैंसर केयर केंद्र में बिजली फाल्ट की समस्या दूर होने के बाद 4-के लेप्रोस्कॉपी मशीन के जरिए पहला सफल ऑपरेशन किया गया है। दूसरे विशेषज्ञों द्वारा भी कैंसर मरीजों के ऑपरेशन शुरू कर दिए है।
डॉ. जितेंद्र चौहान, गेस्ट्रो सर्जन व ओटी इंचार्ज, अटल कैंसर केयर केंद्र