20... जैन मंदिर में प्रवचन करती साध्वी डा. सरिता महाराज। स्वयं
करनाल। श्री दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित सत्संग में साध्वी डाॅ. सरिता महाराज ने कहा है कि जैन धर्म की विरासत दिगंबर मुनि स्वरूप है। हमारे तीर्थकंर दिगंबर थे। जैन धर्म की प्राचीन परंपरा का पता दिगंबर आमना से मिलता हैं। उन्होंने कहा कि जैन धर्म की दोनों आमनाएं दिगंबर और श्वेतांबर महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा जैन और बौद्ध धर्म दोनों भारत में ही हुए लेकिन बौद्ध धर्म भरत में दुर्लभ है, जब कि जैन धर्मगांव गांव में हैं। जैन धर्म में सबसे ज्यादा पुस्तकें ग्रंथ लिखे गए। जैन धर्म अंणु व्रत को पहचान मिली। जैन संतों ने अणु और परमाणु की खोज की थी। उन्होंने कहा कि जो भी आमनाएं हों लेकिन जैन धर्म एक हैं। हम सबक भगवान महाबीर और आदि नाथ के साथ 24 तीर्थंकर है। संवाद