अंबाला। 72.11 करोड़ रुपये की लागत से तैयार छावनी के अटल कैंसर केयर केंद्र में दो साल का समय होने के बावजूद अब तक ब्लड कैंसर विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं हो पाई है।
कैंसर के मरीज वरदान साबित होने वाले इस बिल्डिंग में अब हरियाणा, पंजाब, हिमाचल आदि से मरीज आने लगे हैं लेकिन ब्लड कैंसर विशेषज्ञ मेडिकल आन्कोलॉजिस्ट न होने के कारण मरीजों को अभी भी चंडीगढ़ या फिर रोहतक पीजीआई का सहारा लेना पड़ता है। कई किलोमीटर दूर अस्पताल में आने के बाद मरीजों को पता लगता है कि ब्लड कैंसर का तो इस बिल्डिंग में उपचार ही नहीं है। इन तरह के सभी मरीजों को रेफर करने के अलावा अस्पताल प्रबंधन के पास कोई चारा नहीं रहता।
जबकि ब्लड का कैंसर सभी कैंसर में से घातक माना जाता है। यहीं मौत का कारण भी बन जाता है। निजी अस्पताल की बात करें तो इसके उपचार के लिए मरीजों को लाखों रुपये लाैटाने पड़ते हैं। हालांकि उद्घाटन के समय भी बिल्डिंग में सभी तरह के कैंसर के उपचार करने का दावा किया जा रहा था। कई बार ब्लड कैंसर के मरीजों की ओर से भी यह मांग उठाई है लेकिन मुख्यालय तक मांग पहुंचने के बाद फाइलों तक ही सिमट जाती है।
दो साल के इस लंबे समय में मेडिकल आन्कोलॉजिस्ट की नियुक्ति को लेकर विभाग गंभीर नहीं है। दरअसल, नाै मई 2022 को इस बिल्डिंग का उद्घाटन हुआ था। अब अटल कैंसर केयर केंद्र की ओपीडी करीब एक हजार के आंकड़े को पार कर गई है।
आईसीयू में भी ट्रेंड स्टाफ की दरकार
अटल कैंसर केयर केंद्र में आईसीयू की सुविधा है लेकिन अभी ट्रेंड स्टाफ व बेहोशी के डॉक्टरों की कमी है। मौजूदा समय में आपातकालीन स्थिति यानी किसी बड़े ऑपरेशन के दौरान वेंटीलेटर की जरूरत पड़ती है तो एक बेहोशी के डॉक्टर से ही काम चलाना पड़ रहा है। बताया जाता है कि चार बेहोशी के डॉक्टर, आईसीयू टेक्नीशियन सहित सिक्योरिटी गार्ड और अन्य ट्रेंड स्टाफ की भी जरूरत है।
इन पदों पर भर्ती का इंतजार
- 2 रेडियोओंकोलॉजिस्ट
- 2 सर्जिकल ओंकोलॉजिस्ट
- 2 मेडिकल ओंकोलॉजिस्ट
- 2 रेडिएशन सेफ्टी ऑफिसर
- 3 रेडिएशन थेरेपी टेक्नोलॉजिस्ट
वर्जन
अटल कैंसर केयर केंद्र में स्टाफ की कमी है। इसके लिए मुख्यालय स्तर पर अवगत करवाया जा चुका है। आचार संहिता के बाद स्टाफ की कमी को पूरा कर लिया जाएगा।
डॉ. यशपाल वर्मा, निर्देशक अटल कैंसर केयर केंद्र।