अंबाला लोकसभा सीट पर भाजपा ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। वहीं कांग्रेस में असमंजस की स्थिति है। एक तरफ तो बंतो कटारिया का यह पहला चुनाव है और पार्टी ने जिम्मेदारी बड़ी दी है वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस की तरफ से भी अंबाला लोकसभा सीट के लिए आवेदन करने वालों की सूची में कोई ऐसा नाम नहीं है, जिन्होंने अंबाला लोकसभा के लिए पहले से तैयारी की हो।
बंतो कटारिया पहले भी अपने पति दिवंगत रतनलाल कटारिया के साथ क्षेत्र में भ्रमण पर रही हैं। अंबाला, पंचकूला और यमुनानगर के लोगों से मेलजोल रहा है । वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस की तरफ से अभी इतनी सक्रियता नहीं दिखाई दे रही है। कांग्रेस की तरफ से बार-बार किसी का नाम सामने आ रहा है तो वह हैं कुमारी सैलजा, मगर वह पहले ही लोकसभा चुनाव लड़ने को मना कर चुकी हैं। अब अंबाला लोकसभा सीट पर क्या समीकरण बैठेंगे यह तो समय ही बताएगा। गौरतलब है कि इस सीट पर कांग्रेस से कुमारी सैलजा भी दो बार की सांसद रह चुकी हैं, उन्हें सांसद रतनलाल कटारिया ने शिकस्त भी दी थी। संवाद
पांच विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा और चार में कांग्रेस के विधायक
अंबाला लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है। अंबाला शहर, अंबाला छावनी, पंचकूला, जगाधरी, यमुनानगर विधानसभा में भाजपा विधायक हैं। वहीं कालका, नारायणगढ़, साढ़ौरा, मुलाना विधानसभा में कांग्रेस के विधायक है। अब नारायणगढ़ विधानसभा क्षेत्र निवासी कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद नायब सैनी मुख्यमंत्री बने हैं। इस फायदा भी भाजपा प्रत्याशी बंतो कटारिया को मिल सकता है, लेकिन नारायणगढ़ में कांग्रेस विधायक होने से यह आसान भी नहीं रहने वाला है। दूसरी तरफ इस सीट पर आरक्षित होने के कारण जाट मतदाता कम हैं, लेकिन कहीं न कहीं किसान आंदोलन भी प्रभाव डाल सकता है।
महिला मोर्चा में सक्रिय रही हैं बंतो
भाजपा प्रत्याशी बंतो कटारिया महिला मोर्चा में सक्रिय रही हैं। कहीं न कहीं भाजपा के पास इस सीट के लिए उनसे बेहतर चेहरा भी नहीं था। वह अंबाला छावनी में भी लंबे समय तक रही हैं। वह नया चेहरा हैं। गुटबाजी की भी मोहर नहीं है। इस सीट पर कांग्रेस पुराने चेहरे कुमारी सैलजा को दोहराएगी या कोई नया चेहरा सामने आएगा, इसका इंतजार किया जा रहा है।