हरियाणा में भारत जोड़ो यात्रा के दूसरे चरण में सोमवार को राहुल गांधी ने कुरुक्षेत्र से अंबाला तक पदयात्रा की। महाभारत की धरती से उन्होंने एक बार फिर कांग्रेसियों को तपस्वी बताया। अंबाला के मुलाना में जनसभा के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नाम लिए बिना कहा कि आज 21वीं सदी के कौरव खाकी हॉफ पैंट पहनते हैं और उनके पीछे देश के दो-तीन अरबपति खड़े रहते हैं।
उन्होंने कहा कि ये लोग कभी ‘हर-हर महादेव’ नहीं बोलेंगे, क्योंकि भगवान शिव तपस्वी हैं और ये भारत की तपस्या और संस्कृति पर हमला कर रहे हैं। ‘जय सियाराम’ नारे पर राहुल ने कहा कि आज सही नारे में से इन लोगों ने माता सीता को ही बाहर कर दिया है, मगर यह याद रखना होगा कि हमारे लिए जितने जरूरी श्रीराम हैं, उतनी ही माता सीता भी। इसलिए कांग्रेसी कार्यकर्ताओं से आह्वान है कि उन्हें जहां भी भाजपा के लोग मिलें, उनसे जय श्रीराम की बजाय जय सियाराम का नारा लगवाएं।
राहुल ने नोटबंदी, जीएसटी और तीन कृषि कानून के मुद्दे पर फिर से केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि इन तीनों बिलों पर भले ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साइन किए हों, मगर उनकी कलम के पीछे देश के दो-तीन अरबपतियों की शक्ति थी। राहुल ने प्रधानमंत्री बीमा योजना पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि आज बीमा का पैसा तो किसानों के खाते से कट रहा है, मगर जब प्राकृतिक आपदा से उसकी फसल बर्बाद होती है तो किसान को न बीमा कंपनी मिलती है और न मुआवजा।
किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों को बताया तपस्वी
पांडवों का उदाहरण देते हुए राहुल ने कहा कि पांडव तपस्वी थे, इसलिए उस वक्त कोई अरबपति उनके साथ नहीं खड़ा था। उन्होंने अपना समय जंगलों में बिताया, उसके बाद हर वर्ग के लोग उनके साथ जुड़ते चले गए और उन तपस्वियों ने फिर अन्याय और अधर्म के विरुद्ध युद्ध किया और जीता। राहुल ने कहा कि आज भी एक महाभारत चल रही है, जिसमें किसान, मजदूर और छोटे व्यापारी तपस्वी हैं और इन तपस्वियों के साथ कांग्रेस खड़ी है।
गीता में भी यही संदेश दिया गया है कि तपस्वी को केवल कर्म करना चाहिए, उसके फल की इच्छा नहीं। इसलिए हम चाहते हैं कि सरकार देश के असली तपस्वियों यानी किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों की मदद करे, उनकी रक्षा करे और हमारी भारत जोड़ो यात्रा का मकसद भी यही है कि तपस्वियों की तपस्या व्यर्थ न जाए। जिस दिन किसानों, मजदूरों व छोटे व्यापारियों को तपस्या का फल मिल जाएगा, उस दिन देश का मुकाबला दुनिया में कोई नहीं कर पाएगा।
मेड इन कुरुक्षेत्र और अंबाला लिखा देखना चाहते हैं
राहुल ने कहा कि किसान आंदोलन में 700 किसान शहीद हो गए, मगर केंद्र सरकार उन्हें शहीद मानने को ही तैयार नहीं है। उन्होंने संसद में स्पीकर से जब इन किसानों को श्रद्धांजलि देने के लिए मौन रखने को कहा तो वे नाराज हो गए और मौन रखने की इजाजत नहीं दी। उन्होेंने कहा कि मैं ‘मेड इन चाइना’ सुन-सुनकर तंग आ चुका हूं।
मैं चाहता हूं कि बीजिंग के युवा जब अपना फोन देखें तो उस पर मेड इन कुरुक्षेत्र लिखा हो, माइक्रोस्कोप देखें तो उस पर मेड इन अंबाला लिखा हो। अभी तक अपनी करीब तीन हजार किलोमीटर की यात्रा का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि हमने यह यात्रा करीब चार महीने में पूरी की है और वह भी तीनों वक्त का भोजन करके, मगर देश के मजदूर और किसान अपने काम के दौरान ही चल-चलकर इससे भी कई ज्यादा अधिक यात्रा कर लेते हैं और वह भी आधा पेट भोजन करके।