अंबाला। अंबाला लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे दिवंगत रतनलाल कटारिया की पत्नी बंतो कटारिया को भाजपा ने लोकसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है। उनका जन्म 1964 में घरौंडा में हुआ। इनके परिवार का जुड़ाव शुरुआत से भी जनसंघ से रहा है।
बंतो कटारिया का विवाह 1984 में हुआ। बंतो कटारिया का एक बेटा और दो बेटियां हैं। पूरा परिवार अब पंचकूला स्थित आवास पर रहता है। अगर शैक्षणिक पृष्ठभूमि पर गौर करें तो शादी से पहले बंतो कटारिया सिर्फ मैट्रिक थीं। शादी के बाद उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई की और हरियाणा पंजाब उच्च न्यायालय में वकालत भी की।
खास बात है कि बंतो कटारिया ने वर्ष 1980 में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली थी। इसके बाद भाजपा में रहकर मंडल अध्यक्ष से लेकर मौजूदा समय में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष तक सफर तय किया है। इतना भी बंतो कटारिया गेल इंडिया की स्वतंत्र निदेशक का पद भी संभाल चुकी है।
कटारिया परिवार का राजनीति से रहा है नाता
बंतो कटारिया के पति रतनलाल कटारिया भी देश की राजनीति में अहम रसूख रखते थे। तीन बार अंबाला लोकसभा से सांसद रहे। इससे पहले वर्ष 1985 में रादौर विधानसभा से विधायक भी रहे। इसके साथ ही राजस्व मंत्री भी रहे तो वर्ष 2019 में भाजपा की केंद्र सरकार में केंद्रीय जलशक्ति और सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री भी रहे।
रतनलाल कटारिया मृदुभाषी होने के कारण विरोधियों को भी साथ लेकर चलते थे। खास बात है कि रतनलाल कटारिया अपने दौरों के दौरान पत्नी बंतो कटारिया को भी साथ लेकर चलते थे और अपने मजाकिया अंदाज में सत्ता के शीर्ष पर बैठे गणमान्यों से परिचय कराते थे। खास बात यह भी है कि रतनलाल कटारिया का परिवार शुरू से ही जमीन से जुड़ा रहा। उनके पिता बेटे के राजनीति के शीर्ष पर पहुंचने के बावजूद जूते गांठने का काम करते रहे।
रतनलाल अपने सीधे स्वभाव के लिए जाने जाते थे। ऐसे में बंताे कटारिया ने उनकी राजनीति को सबसे करीब से देखा है। यही बात है कि जब रतनलाल कटारिया का निधन हुआ तो शोक सभा हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर लाल भी पहुंचे थे और उन्हें बंतो कटारिया के सिर पर हाथ रखकर सांत्वना भी दी थी।
टिकट मिलने के ये हैं कारण
-बंतो कटारिया मिलनसार और साफ छवि की हैं।
-वह भाजपा से लंबे समय से जुड़ी हुई हैं और पार्टी के कई मोर्चों में काम कर चुकी हैं और लंबे समय से भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं। इसके साथ ही कार्यकर्ताओं में अच्छी पैंठ है।
-अंबाला लोकसभा सीटी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, ऐसे में स्व. रतनलाल कटारिया की राजनैतिक विरासत को वह अच्छे से संभाल सकती हैं। जबकि भाजपा के पास अभी तक इनसे मजबूत चेहरा लोकसभा क्षेत्र में नहीं था।
- विशेष तौर पर महिला उत्थान के केंद्र सरकार के कार्यों में बढ़चढ़ कर योगदान दिया।
जातीय आधार पर समीकरण
बंतो कटारिया अनुसूचित जाति से आती हैं। अनुसूचित जाति के अंबाला लोकसभा चुनाव में साढ़े चार लाख के करीब वोट हैं। ऐसे में भाजपा के कोर वोटर के साथ-साथ उन्हें अनुसूचित जाति के वोटों का भी फायदा मिलेगा।
कांग्रेस में संभावित उम्मीदवार
अभी तक कांग्रेस ने पत्ते नहीं खोले हैं मगर अंबाला लोकसभा के लिए कुमारी सैलजा और डॉ. कपूर सिंह के नाम चल रहे हैं। इसके अलावा इस सीट के लिए 20 के करीब इच्छुक नेताओं ने आवेदन किया है।