अंबाला। परिंदों को मंजिल मिलेगी यकीनन, ये फैले हुए उनके पंख बोलते हैं, वो लोग रहते हैं खामोश अक्सर, जमाने में जिनके हुनर बोलते हैं... यह पंक्तियां भले ही किसी शायर की हों, लेकिन अंबाला से स्पेशल चाइल्ड अंशु पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। स्पेशल ओलंपिक में मेडल झटकने वाला अंशु भले ही कम बोलता है, लेकिन उसका हुनर पूरे देश में बोल रहा है।
अंशु का जन्म एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था और जन्म के बाद से परिवार ने बड़े ही लाड प्यार से पाला। जैसे-जैसे बढ़ा होता गया तो सामान्य बच्चों की तरह न होने के कारण पिता मदन लाल व मां पूनम ने कुछ करने की उम्मीद ही छोड़ दी थी। करीब आठ साल पहले अंशु पिता के साथ मंडे मार्केट में लगने वाले स्टाॅल पर चले जाते था और अंशु भी वहीं बैठा करता था। तभी अंशु पर वात्सल्य स्कूल के कोच चंद्रहास शर्मा की नजर पड़ी।
उस समय समझाने के बाद जैसे ही वात्सल्य स्कूल के मैदान में रोलर स्केट के साथ उतारा तो अंशु ने एक के बाद एक मेडलों की झड़ी लगा दी। जिला, राज्य स्तरीय लेवल पर रोलर स्केटिंग में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। पहली बार स्पेशल ओलिंपिक में गया तो एक साथ तीन मेडल झटक लिए। संवाद
मां बोली- बचपन में कई बार बिछड़ गया
अंशु की मां पूनम ने कहा कि सामान्य बच्चों की तरह न होने पर अंशु कई बार घर से बाहर जाता था और बिछड़ जाता था। फिर पूरा परिवार मिलकर ढूंढता था। ऐसे में मायके में भी कई बार घर से निकल जाता था और ढूंढकर लाते थे। अब अंशु ने वो कर दिखाया तो केवल दूसरों का सपना होता है।
काफी भटके, गृहमंत्री अनिल विज ने एक दिन में बनवाया पासपोर्ट
पिता मदन व मनोनीत सदस्य अजय बवेजा ने कहा कि अंशु के जर्मनी जाने में गृहमंत्री अनिल विज ने अहम भूमिका निभाई। पहले परिजनों ने कई बार अंशु का पासपोर्ट अप्लाई किया, लेकिन कोई न कोई अड्चन आ रही थी। आखिर में दिन नजदीक आने पर गृहमंत्री अनिल विज से गुहार लगाई तो महज एक ही दिन में अंशु का पासपोर्ट बनकर आ गया।