अंबाला। पांच हजार रुपये उधार देने का मामला इतना तूल पकड़ गया कि जटवाड़ गांव निवासी हरजिंदर सिंह पर हमला हो गया। उसे मरा समझकर आरोपी घर के बाहर छोड़कर फरार हो गए।
हाईकोर्ट में जैसे ही मामला पहुंचा तो तथ्यों की जांच के आधार पर दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। मामले में संज्ञान लेते हुए पंजोखरा पुलिस ने मुख्य आठ आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित हरजिंदर सिंह ने आरोप लगाते हुए बताया कि आरोपी जसबीर सिंह और गुरदीप सिंह, उससे पांच हजार रुपये लिए थे। जब पैसे वापस मांगे तो आरोपी व्यक्तियों ने बहाना बनाकर टाल दिया।
इसके अलावा आरोपियों ने उसके परिवार को परेशान करने के उद्देश्य से पीड़ित के खेतों में अतिरिक्त पानी बहाकर उसमें पानी भरना शुरू कर दिया। जब आवेदक ने इसका विरोध किया तो आरोपी जसबीर सिंह, गुरदीप सिंह, राजिंदर कौर और हरजिंदर कौर ने आवेदक की हत्या करने के लिए आरोपी डालमिक सिंह, गुरप्रीत सिंह, सरबजीत सिंह और दिलबाग सिंह के साथ साजिश रची ली। इस साजिश को सिरे चढ़ाने के लिए 15 सितंबर 2021 को रात्रि लगभग साढ़े नौ बजे घर लौट रहे पीड़ित हरजिंदर सिंह और उसके दोस्त गुरजिंदर को आरोपियों ने घेर लिया।
इसके बाद पीड़ित हरजिंदर सिंह पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। जब उसके दोस्त गुरजिंदर ने बचाने की कोशिश की तो उस पर भी हमला कर दिया। इसके बाद गुरजिंदर मौके से मदद बुलाने के लिए भाग गया। जब तक वह वापस आया तब तक आरोपियों ने हरजिंदर को मरा समझकर उसके घर के ही नजदीक फेंक दिया था। इस दौरान आरोपियों ने हरजिंदर की जेब से तीन हजार रुपये और हाथ में पहनी हुई सोने की अंगूठी भी निकाल ली। इसके बाद घायल हरजिंदर को परिचितों द्वारा अस्पताल पहुंचाया गया। जहां गंभीर हालत के चलते उसे चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया।
इस संबंध में बाकायदा एमएलआर भी काटी गई। आरोप था कि इस मामले में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।पीड़ित का आरोप है कि इसमें तत्कालीन एएसआई बलकार, तत्कालीन एसएचओ पंजोखरा मोहन लाल, तत्कालीन डीएसपी अंबाला कैंट राम कुमार और डीएसपी के रीडर चमन लाल ने भी हीलाहवाली की।
हरजिंदर ने आरोप लगाया कि मेडिकल रिपोर्ट होने के बावजूद उक्त पुलिस अधिकारियों ने आठों आरोपियों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की और न ही एफआईआर दर्ज की। हाई कोर्ट के आदेश के बाद स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने इस मामले की जांच की। इसमें मारपीट का मामला मानते हुए आठ आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया। जबकि पीड़ित द्वारा पुलिस अधिकारियों पर लगाए आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। अभी मामले की आगे जांच चलेगी वैसे केस में अन्य धाराएं लगाई जाएंगी।