रेडक्रॉस के अंबाला छावनी में चल रहे वृद्धाश्रम में महेश अपनी बहन दृष्टिहीन कृष्णा से राखी बंधव
अंबाला। अपनों के होते हुए भी वृद्धाश्रम में जीवन बिता रहे बुजुर्गाें की आंखें अकसर रक्षाबंधन पर नम हो जाती हैं। बचपन से जिन भाइयों-बहनों ने एक-दूसरे से राखी बंधवाकर उम्रभर रक्षा का वादा लिया था, आज वह उनका हाल जानने भी नहीं आते।
इन महिलाओं को सगे भाइयों की ओर से ठुकराए जाने का मलाल है। इस बीच अंबाला छावनी के रेडक्रॉस की ओर से संचालित अपना घर यानी वृद्धाश्रम में रहने वाली दृष्टिहीन 68 वर्षीय कृष्णा व 70 वर्षीय बुजुर्ग महेश भाई-बहन के रिश्ते की मिसाल बने है।
अपनों से दूर होने के बाद वृद्धाश्रम में ही आकर मिले दोनों बुजुर्ग पिछले 8 साल से भाई-बहन के बंधन में बंधे हुए है। महेश दृष्टिहीन कृष्ण की लाठी बनकर हर सुख दुख में सहारा बने हैं। दोनों की यहीं अंतिम इच्छा है कि आखिरी समय तक केवल एक-दूसरे के साथ रहें।
रिश्तों से धोखे के बाद अनजान बने सहारा
बुजुर्ग महेश ने बताया कि अंबाला सिटी के रहने वाला हैं। शादी के बाद पत्नी व बच्चों का देहांत हो चुका है। 2011 में वह वृद्धाश्रम में आ गए थे। बाद में पत्नी का भी देहांत हो गया था। दो बेटी शादीशुदा है और एक बेटा है लेकिन किसी ने नहीं रखा। आज भी बच्चे आते हैं पर रिश्ता केवल दिखावे का रह गया है। सभी रिश्तों से मन उठ गया था लेकिन वृद्धाश्रम में आकर कृष्णा से बहन का साथ मिला।
उधर, दृष्टिहीन कृष्णा ने बताया कि शादी के बाद पति और दोनों बच्चों का देहांत हो चुका है। ससुराल वालों ने रहने से मना कर दिया। पिता व भाई ने भी नहीं रखा। आखिर में 2015 में वृद्धाश्रम में ही छोड़ गए थे। तभी से यही घर है। जीवन में केवल एक रिश्ता बना है भाई महेश के साथ, जो अब अंतिम सांस तक चलेगा