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Ambala News: खाने की नली में कैंसर के बीच स्टंट डालकर बनाया रास्ता

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अंशु शर्मा
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अंबाला। अटल कैंसर केयर केंद्र में गेस्ट्रो सर्जन डॉ. जितेंद्र सिंह चौहान ने हार्ट की तर्ज पर मरीज के खाने की नली में कैंसर वाली जगह पर स्टंट डालकर रास्ता बनाया । ये स्टंट एंडोस्कोपी के जरिए डाला गया। ऐसा करने पर कैंसर के बीच जाकर यह स्टंट खुल जाता है और मरीज आसानी से खाना-पीना खा सकता है। पहले इस जटिल सर्जरी के लिए मरीजों को पीजीआई रेफर किया जाता था। प्राइवेट अस्पतालों में इसका लाखों रुपये खर्च आ जाता था। अटल कैंसर अस्पताल में ये स्टंट निशुल्क डाला गया।
उन्होंने एक दिन में दो सफल ऑपरेशन किए। पहला सहारनपुर की 52 वर्षीय सुदर्शना रानी का तो दूसरा अंबाला छावनी निवासी 55 वर्षीय जरनैल सिंह का हुआ है। चिकित्सक के मुताबिक खाने की नली में कैंसर फैल जाता है और वो सीधा खानपान पर असर डालता है। इतना ही नहीं मरीज को अपना बलगम तक निगलने में परेशानी होती है। इस स्थिति में धीरे-धीरे मरीज कमजोर होता चला जाता है। गेस्ट्रो सर्जन डॉ. जितेंद्र के अलावा उनकी टीम में बेहोशी के डॉक्टर वेद पाठक, ओटी असिस्टेंट सुरेंद्र, राहुल, प्रथम व नर्सिंग ऑफिसर गुरविंद्र, दिव्या शामिल रहे।
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तंबाकू व शराब के अत्यधिक सेवन से रहता है सबसे ज्यादा डर

गेस्ट्रो सर्जन डॉ. जितेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि खाने की नली का कैंसर एक सामान्य कैंसर है, जो महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में अधिक देखने को मिलता है। खाने की नली के कैंसर को अनेक नामों से जाना जाता है, जैसे- ग्रसिका का कैंसर , आहार नली या भोजन नली का कैंसर । समय पर निदान नहीं किया जाए तो, यह बीमारी पीड़ित व्यक्ति में असुविधा के साथ-साथ मृत्यु का कारण भी बन सकती है। इसलिए आपको खाने की नली में कैंसर की पूर्ण जानकारी होना आवश्यक है। अधिक मात्रा में तम्बाकू और शराब का सेवन, एसोफैगल कैंसर के लिए जिम्मेदार हो सकती है। इसके अतिरिक्त अनेक प्रकार के कारक, खाने की नली में कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं

दो प्रकार के होते हैं खाने की नली के कैंसर
स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा : स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा प्रकार का एसोफैगल कैंसर, खाने की नली (ग्रासनली) के अस्तर को बनाने वाली फ्लैट, पतली कोशिकाओं में शुरू होता है। इस प्रकार का कैंसर, खाने की नली के ऊपरी या मध्य भाग में सबसे अधिक दिखाई देता है।
एडेनोकार्सिनोमा : जब ग्रासनली में श्लेष्म जैसे तरल पदार्थ का उत्पादन करने वाली ग्रंथियों की कोशिकाओं में कैंसर की शुरूआत होती है, तब यह ग्रसिका का कैंसर एडेनोकार्सिनोमा प्रकार का होता है। एडेनोकार्सिनोमा सबसे अधिक खाने की नली के निचले हिस्से को प्रभावित करता है।
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खाने की नली के कैंसर के लक्षण

- अनियमित रूप से वजन में कमी आना

- खट्टी डकार आना
- सीने में जलन
- निगलने में दर्द या कठिनाई महसूस होना

- भोजन करते समय बार-बार घुटन होना

- उल्टी होना

- भोजन वापस ग्रासनली में ऊपर आना

- छाती (सीने) में दर्द होना

- थकान महसूस होना

- पुरानी खांसी
- हिचकी आना, इत्यादि।

अटल कैंसर केयर केंद्र में हरियाणा के अलावा दूसरे राज्यों के मरीजों का भी काफी रूझान है। यहीं कारण है कि डॉक्टरों की तरफ से समय-समय पर प्रयास किए जाते हैं कि मरीजों को इसी बिल्डिंग में आधुनिक उपचार मिल सके। गले की नली में कैंसर के बीच स्टंट डालकर रास्ता बनाना काफी जटिल होता है लेकिन यह कर दिखाया है।
डॉ. यशपाल, अतिरिक्त निदेशक, अटल कैंसर व केयर केंद्र अंबाला
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