अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी के बेस कैंप पर तिरंगा लहराते हुए अंबाला शहर के वरिष्ठ इंजीनियर दिनेश कांत जिंदल भावविभोर हो उठे। 54 वर्षीय डीके जिंदल आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के माध्यम से अंबाला निवासियों को योग साधना व प्राणायाम भी सिखाते हैं। उनका मानना है कि इस आयु में ऐसा कठिन पर्वतारोहण केवल भगवत कृपा व योग साधना के माध्यम से ही संभव हो पाया है। डीके जिंदल ने बताया कि 12 दिनों की मुश्किल भरी यात्रा करके वे काठमांडू पहुंचे। 11 सदस्य की टीम के साथ ट्रैकिंग करते हुए दूसरे दिन वह लोकुला से 2610 मीटर की ऊंचाई पर फाकडिंग पहुंच थे। तीसरे दिन 3450 मीटर पर नामचे पहुंच कर सागरमाथा नेशनल पार्क का आनंद लिया और यहां से एवरेस्ट के शिखर के भी दर्शन कर पाए। यह एक मनोरम दृश्य था। नामचे से तिंगबोचे, डिंगबोचे होते हुए फिर लगभग 4910 मीटर की ऊंचाई पर लोबुचे पहुंचे। हड्डियां गला देने वाली बर्फीली हवा का सामना करते हुए हमारी टीम कदम कदम आगे बढ़ती रही। प्रतिदिन यात्रा शुरू करने से पहले योग साधना व सुदर्शन क्रिया उन्हें ऊर्जा प्रदान कर रही थी और फिर वह सुनहरा दिन उनके स्वप्न को पूरा करने वाला अविस्मरणीय दिन बना जिस दिन वे इस कठिन यात्रा के सधे हुए अंतिम पड़ाव माउंट एवरेस्ट बेस कैंप 5364 मीटर पर देश का तिरंगा फहराने में सफल हुए।