- स्वास्थ्य विभाग की अलग-अलग टीमों ने 334 स्थानों से पीने के पानी के भरे सैंपल
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला सिटी।
बाढ़ के बाद साफ पेयजल एक चुनौती बन गया है। इसके लिए पानी निकलने के पहले ही दिन से स्वास्थ्य विभाग की टीमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जाकर पेयजल के सैंपल ले रहीं हैं। इन सैंपलों की जब बैक्टीरियल जांच की गई तो 46 स्थानों पर पेयजल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाया गया। ऐसे में आनन-फानन में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने उन स्थानों पर पेयजल को साफ करने की अपनी प्रक्रिया शुरू की। जिसमें क्लोरीन की गोलियां आदि डाली गईं। इसके साथ ही लोगों को सप्लाई का पानी न पीने की सलाह दी गई। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों को देखें तो अभी तक विभाग की टीमें कुल 334 स्थानों पर पेयजल के सैंपल ले चुकी हैं। जिसमें 288 पानी के सैंपल सही पाए गए। जबकि 46 सैंपलों में भरा हुआ पानी पीने योग्य नहीं था वह बीमार कर सकता था। यही कारण है कि इन क्षेत्रों से मरीजों की तादात भी स्वास्थ्य शिविर में अधिक दिखाई दी। इसमें अंबाला शहर के क्षेत्र अधिक हैं।
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पेयजल के लिए दो प्रकार के हो रहे टेस्ट
पेयजल की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें दो प्रकार के टेस्ट कर रही हैं। पहला ओटी टेस्ट है जिसको मौके पर ही जांच कर बताया जाता है कि पानी पीने योग्य है या नहीं। मगर कुछ स्थानों पर बैक्टीरियल टेस्ट कराया जा रहा है। इस टेस्ट को अंबाला शहर के सेक्टर 10 स्थित मालिकुलर लैब में टेस्ट में किया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट दो दिन बाद आती है। इसमें देखा जाता है कि पानी में कौन-कौन से बैक्टीरिया है। कितनी सैंसिटिविटी है। पीने योग्य है या नहीं।
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