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Ambala News: साहित्यिक संगोष्ठी में जुड़े देश-विदेश के 28 प्रतिभागी

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अंबाला। छावनी में हिंदी दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद से संबद्ध राष्ट्रभाषा विचार मंच की ओर से गूगल मीट पर एक विचार साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया। इस संगोष्ठी में देश विदेश के 28 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का प्रारंभ राष्ट्रभाषा विचार मंच के महामंत्री डॉ.जय प्रकाश गुप्त ने सरस्वती वंदना से किया।
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इसके बाद मंच की प्रधान और पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. शशि धमीजा ने अपने बीज वक्तव्य में भारत की राजभाषा हिंदी के महत्त्व और उसके समृद्ध इतिहास का वर्णन किया। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से जुड़े शिक्षक मनोज सवेन ने भारत में विद्यालयी शिक्षा का माध्यम हिंदी होने के लाभ और इस दिशा में उनके प्रयास व परिणामों की चर्चा की। झारखंड की राजधानी रांची से जुड़े शशांक भारद्वाज ने प्रचलित हिंदी में अरबी फारसी के शब्दों की बहुलता के प्रति अपनी चिंता व्यक्त करते हुए इसके प्रति सावधानी बरतने का परामर्श दिया और बताया कि वह लगभग एक दशक से इस क्षेत्र में चेतन जागृत कर रहे हैं।
दिल्ली से जुड़े वरिष्ठ कवि कुबेर गौतम ने राष्ट्रभाषा हिंदी को समर्पित छंद प्रस्तुत किए। अंबाला छावनी से ही वरिष्ठ साहित्यकार ओम बनमाली ने अपनी सार्थक रचनाएं प्रस्तुत कीं। सेवानिवृत्त शिक्षिका क्षमा लांबा ने भी हिंदी दिवस से संबंधित कविता प्रस्तुत की । गुरुग्राम हरियाणा से जुड़ीं परिणिता सिन्हा ने अपने वक्तव्य व रचनाओं में हिंदी के महत्व को रेखांकित किया। उत्तर प्रदेश के नोएडा से हिमानी ने हिंदी के प्रति अपना समर्पण व प्रतिबद्धता ज्ञापित करते हुए एक रचना प्रस्तुत की।
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देहरादून से जुड़ीं रश्मि भटनागर ने हिंदी दिवस पर पहाड़ों की व्यथा को अपनी रचना में प्रतिपादित किया। फरीदाबाद से सुशील आनंद ने एक सुंदर रचना प्रस्तुत की। यूरोप के स्पेन से जुड़ीं प्रियंका ने स्पेन में उनके हिंदी भाषा के अनुभव बताए। छावनी राजकीय महाविद्यालय की वनस्पति विभागाध्यक्ष डॉ. रोहिणी ने हिंदी को लेकर अपने अनुभव सांझा किए। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ में वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. शीश शिवरूपम ने भी हिंदी के महत्व की चर्चा की। पंचकूला से रेखा शर्मा ने एक सुंदर गीत प्रस्तुत किया। आर्य गर्ल्स कॉलेज की हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. ममता भटनागर हिंदी को समर्पित एक उत्तम रचना प्रस्तुत की।
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