फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ambala News: जंगली बेर खाने से बिगड़ी 16 बच्चों की तबीयत

विज्ञापन
विज्ञापन
अंबाला। शहजाद के साथ लगते कक्कड़ माजरा में स्कूली बच्चों की जंगली बेर खाने से तबीयत बिगड़ गई। इन बच्चों को पहले शहजादपुर के अस्पताल में ले गए। यहां से उन्हें छावनी के नागरिक अस्पताल में रेफर कर दिया। यहां से बच्चों को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद बच्चों की तबीयत में सुधार है।
विज्ञापन

हुआ यूं कि स्कूल से घर के लिए निकले बच्चे बीच रास्ते ही बेसुध होकर गिरने लगे। कुछ बच्चों के पेट में दर्द की शिकायत हुई और वे उल्टियां करने लगे। यह घटना कक्कड़ माजरा के ईंट भट्ठे पर काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों के बच्चों के साथ हुई। घर पहुंचने पर बच्चों की तबीयत देख परिजन घबरा गए और वो चीख-चिल्लाते हुए बच्चों को गोदी में उठाकर शहजादपुर के नागरिक अस्पताल पहुंचे।
यहां बच्चों की गंभीर हालात के चलते उन्हें एंबुलेंस के माध्यम से अंबाला छावनी के नागरिक अस्पताल रेफर कर दिया। यहां पहुंचते ही सभी बच्चों का उपचार शुरु किया गया। कुछ बच्चों का पेट साफ कराया तो कुछ को दूसरी दवा दी। हालांकि उपचार के बाद बच्चों की हालत में सुधार नजर आया, लेकिन डाक्टरों ने बच्चों को अभी निगरानी में ही रखने का फैसला किया है।
विज्ञापन

बच्चों की उम्र तीन से 15 वर्ष
सिविल अस्पताल में मौजूद बच्चों के परिजन निरंजन, मुनिया, गोमती और सुंदर ने बताया कि उनके तीन से 15 वर्ष के बच्चे बाग वाला गांव के सरकारी स्कूल कक्षा में पढ़ते हैं। बुधवार दोपहर को वो स्कूल से दोपहर दो बजे छुट्टी के बाद घर के लिए चले थे लेकिन बीच रास्ते पेड़ पर लटके बेर खा लिए लेकिन कुछ देर बाद उनके बच्चे बीच रास्ते बेसुध होकर गिरने लगे तो कुछ को चक्कर आने लगे।
जब एक बच्चा घर पहुंचा और उसने घटना की जानकारी दी कि रूबी, रिया, चांदनी, नैना, सीमा सहित अन्य बच्चे बीमार हो गए हैं तो वो तुरंत मौके पर पहुंचे और फिर उन्हें लेकर शहजादपुर के अस्पताल गए, यहां से उन्हें अंबाला छावनी भेज दिया।
रास्ते में खा लिए थे बेर
छावनी के सिविल अस्पताल में मौजूद बच्चों ने बताया कि बीच रास्ते बेर देखकर उनका मन ललचा गया, हालांकि उन्हें स्कूल में खाना भी मिला था। बावजूद इसके बच्चों ने काफी बेर खा लिए और इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। बच्चों के स्कूल बैग से भी कुछ बेर मिले थे, जब इन्हें ड्यूटी डाक्टर को दिखाया गया तो वो जंगली बेर निकले।
अस्पताल में नजर आई बेड की कमी
नागरिक अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लगातार मरीजों की संख्या बढ़ती देख बेडों की कमी खलने लगी। शहजादपुर से आए बीमार बच्चों को भी बेड की कमी खली। एक बेड पर तीन से चार बच्चों को लेटाकर ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा था। वहीं, कुछ अन्य मरीज बेड की कमी के चलते डाॅक्टरों से बहस करते नजर आए।
वर्जन
शहजादपुर अस्पताल से लगभग 16 बच्चे रेफर होकर आए थे। इन बच्चों ने जहरीले बेर खा लिए थे और वह भी काफी मात्रा में। इस कारण इनकी तबीयत बिगड़ गई। सभी बच्चों को प्राथमिक उपचार दिया गया है और मामले की जानकारी आरएमओ को भी दी गई है। बच्चों की हालत में पहले से सुधार है, फिर भी इन्हें अभी निगरानी में रखा है ताकि किसी बच्चे को कोई परेशानी न हो।
विज्ञापन

डॉ. प्रगति गर्ग, सिविल अस्पताल,अंबाला छावनी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें