जनता के पैसे का नौकरशाह और नेता किस कदर दुरुपयोग करते हैं इसका एक नमूना बल्लभगढ़ बस डिपो पर देखा जा सकता है। यहां करीब 18 करोड़ रुपये की सिटी बसें खड़ी-खड़ी कबाड़ हो गईं। जनता सवाल कर रही है कि जब इन बसाें को चलाना ही नहीं था, तो खरीदा ही क्यों गया। क्या यह जनता के पैसे की बर्बादी नहीं। जिले में सिटी बस सेवा के तहत वर्ष 2009 से एक के बाद एक 150 सिटी बसें बल्लभगढ़ डिपो पर आईं। लेकिन इनमें से करीब 60 बसें ऐसी हैं जो एक बार भी सड़क पर नहीं उतरीं। एक-एक गाड़ी की कीमत 55 से 60 लाख रुपये तक है। हमने जब यात्रियों से बातचीत की तो पता चला कि लोग यहां की व्यवस्था से असंतुष्ट हैं। पेश है संवाददाता शैली खुल्लर और फोटोग्राफर गौरव चौधरी की रिपोर्ट।
समय पर नहीं मिलतीं बसें:
-मच्छगर निवासी जितेंद्र ने बताया कि वह बल्लभगढ़ से ओल्ड फरीदाबाद के लिए सिटी बस सेवा लेते हैं लेकिन उन्हें समय पर बस नहीं मिलती। कई बार आधे घंटे से लेकर एक घंटे तक बस का इंतजार करना पड़ता है।
कई रूट अभी भी नहीं शामिल
जुन्हेड़ा निवासी विकास ने बताया कि जिले के कई रूटों को शामिल ही नहीं किया गया है। कई बार बसों के लिए विभाग को मांग पत्र दिया गया है, लेकिन कोई कार्रवाई नही हुई।
निजी साधनों का ही सहारा
-चांदपुर निवासी ललित ने बताया कि वह पढ़ने के लिए दिल्ली जाते हैं लेकिन इस रूट पर भी सिटी बसें समय पर नही चलती हैं। इस कारण वह अक्सर निजी बसों या ऑटो से जाते हैं।
....और इस तरह बेकार हो गईं बसें
- हरियाणा रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रवक्ता राम आसरे ने बताया कि इन बसों को वर्ष 2009 में लाया गया लेकिन चलाने की कोशिश अप्रैल 2012 में की गई। इस बीच इनकी मेंटेनेंस नहीं की गई। इस वजह से यह बसें डिपो से बाहर नहीं आ पाईं। पहले ड्राइवर नहीं थे और जब ड्राइवर आए तो बसें जवाब दे गईं। इस पर जब विभाग ने सप्लायर कंपनी से मरम्मत के लिए मैकेनिक मांगे तो उसने लंबे समय तक संपर्क न करने को आधार बताते हुए बसों की मरम्मत करने से मना कर दिया। जब बसें खड़ी ही करनी थी तो खरीदी क्यों गईं। इस समय रूट पर 68 बसें चल रही हैं।
बल्लभगढ़ डिपो के महाप्रबंधक यशपाल यादव का कहना है कि जो सिटी बसें सही हैं उन्हें रूटों पर चलाया जा रहा है और प्रयास किया जा रहा है कि अधिक से अधिक यात्रियों को बस सेवा मिल सके। सिटी बसों को लेकर जो समस्याएं हैं उसके निदान के लिए उच्चाधिकारियों से संपर्क किया जा रहा है।