एक तरफ गुजरात में चुनावी शोर नज़र आ रहा है। वहीं दूसरी तरफ डायमंड सिटी सूरत बेचैन नजर आ रही है। शहर की रत्न एवं आभूषण उद्योग की अहम कड़ी हीरा उद्योग पर वैश्विक मंदी का असर दिखाई देने लगा है। क्रिसमस नजदीक होने के बावजूद अमेरिकी बाजारों में खास मांग नहीं दिख रही है। वहीं चीन के बाजार भी लॉकडॉउन की वजह से पूरी तरह से खुले नहीं हैं। सूरत के डॉयमंड कारोबारियों का कहना है कि अमेरिका में लॉकडाउन के बाद अब सभी बाजार खुल गए हैं, लेकिन डिमांड कम है। जिसकी वजह से कच्चे माल का दाम बढ़ रहा है। हीरे की पॉलिशिंग भी कम हो रही है। अभी बड़े आकार के हीरों की मांग बुरी तरह प्रभावित हुई है और छोटे आकार वाले हीरों की मांग सामान्य है, जबकि प्रयोगशालाओं में तैयार होने वाले हीरों की मांग में तेजी देखी जा रही है।
सूरत डायमंड कारोबारियों का कहना है कि अमेरिका सहित अन्य देशों के लोगों ने कोरोना के दौरान जोड़े गए रुपयों को सूरत में हीरे और उससे जुड़े जेवरातों में बहुत निवेश किया। इसका नतीजा यह रहा कि सूरत के बाज़ार से 10 से 12 फीसदी ज्यादा हीरा एक्सपोर्ट हुआ। लेकिन अमेरिका सहित अन्य देशों में नज़र आ रही वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में नरमी का संकेत हीरा उद्योग में भी दिख रहा है।
लोग कृत्रिम हीरा खरीद रहे, जबकि हीरे के दाम कम हैं
आज सूरत में भी प्राकृतिक हीरे का कारोबार सिकुड़ रहा है, तो प्रयोगशाला में तैयार कृत्रिम हीरे की मांग बढ़ रही है। अमर उजाला से चर्चा में सूरत में हीरे के करोबारी नीलेश भाई बोड़की कहते हैं कि अभी कारोबार में थोड़ी गिरावट आई है। सबसे ज्यादा बड़े आकार (एक कैरट से ऊपर) वाले हीरे की मांग प्रभावित हुई है। भारतीय हीरे का सबसे बड़ा बाजार अमेरिका है, जहां बड़े आकार के हीरे की मांग लगातार कम हो रही है। लोग शौक पूरा करने के लिए कृत्रिम हीरा खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा कि मांग कम होने की वजह से हीरे के दाम भी कम हो रहे हैं। निर्यात मांग में गिरावट के बावजूद छोटे आकार के हीरे की मांग पहले की तरह बनी हुई है, लेकिन बड़े आकार के हीरे की मांग काफी घट गई है। कच्चे हीरे के दाम बढ़े हैं, जबकि तराशे गए हीरे की कीमतों में गिरावट आ रही है।
अमेरिका के चक्कर में भारत को मंहगे हीरे बेच रहा रूस
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने अलरोसा कंपनी के हीरों की अमेरिका में बिक्री पर रोक लगा दी है। साथ ही किसी भी अमेरिकी नागरिक के अलरोसा से व्यापार पर भी रोक लगा दी है। इन प्रतिबंधों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय हीरा कारोबार में अलरोसा का प्रभाव बरकरार है। कंपनी सप्लाई घटा या बढ़ाकर कीमतें कंट्रोल कर सकती है और फिलहाल कंपनी ने सप्लाई घटाकर हीरे की कीमतें बढ़ा रखी हैं। भारत में कटिंग और पॉलिशिंग के बाद अलरोसा के हीरों की अमेरिका में बिक्री पर भी कोई रोक-टोक नहीं है। ऐसे में रूस भारत को महंगे हीरे बेचकर मुनाफा भी कमा रहा है और भारत के रास्ते अंतरराष्ट्रीय हीरा कारोबार पर कंट्रोल भी बनाए हुए है।
रूस और यूक्रेन युद्ध का भी दिख रहा है असर
हीरा व्यपारियों का कहना है कि दोनों देशों के युद्ध के कारण भारत हीरा उद्योग में अनिश्चितता कायम है। हमारे लगभग 40 फीसदी हीरे रूस से आपूर्ति किए जाते हैं। आज भी भुगतान के मुद्दे हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। दुनिया के लगभग 95 फीसदी हीरे भारत में कट और पॉलिश होते हैं। सूरत को रफ डायमंड की कटिंग व पॉलिशिंग का हब माना जाता है। पिछले वित्तीय वर्ष में भारत से कट और पॉलिश किए गए हीरों का कुल सकल निर्यात 25.47 अरब अमेरिकी डॉलर रहा था। फरवरी 2021 तक भारत के गोल्ड व डायमंड ट्रेड की देश की जीडीपी में हिस्सेदारी 7.5 फीसदी थी। वहीं कुल निर्यात में गोल्ड व डायमंड ट्रेड की हिस्सेदारी 14 फीसदी है। भारतीय हीरा उद्योग वित्त वर्ष 2021-22 में 24 अरब डॉलर की आय का लक्ष्य कर रहा है। अगर यह लक्ष्य प्राप्त हो गया, तो यह महामारी-पूर्व के स्तर पर वापस आ जाएगा। लेकिन अगर रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से लगाए गए प्रतिबंधों के चलते भारत का हीरा उद्योग बड़े पैमाने पर प्रभावित हुआ, तो रिकवरी प्रभावित हो सकती है।
80 फीसदी से अधिक अलरोसा हीरे बेल्जियम के माध्यम से आते हैं
ये हैं हीरा कारीगरों की मांगें
ऐसा माना जाता है कि दुनिया के 10 रफ डायमंड में से नौ डायमंड की पॉलिशिंग का काम गुजरात में होता है। अभी भी 18 से 20 लाख लोग हीरे की पॉलिशिंग के क्षेत्र में काम करते हैं। गुजरात के हीरा कारोबारी और रत्न कलाकारों की एक बड़ी मांग ये है कि उनके कारखानों को बिजली में राहत दी जाए।
कारोबारियों का कहना है कि उनका पेमेंट आए दिन किन्ही न किन्ही कारणों से फंसता है। इसके लिए गुजरात सरकार को चाहिए कि वो एक SIT गठित करे। कारखानों के मालिक और कारीगरों दोनों की ओर से एक कॉमन मांग ये है कि अगर काम करते वक्त कोई भी दुर्घटना का शिकार हो जाता है, तो सरकार उसकी मदद करे। उसे दुर्घटना बीमा के तहत मुआवजा दिया जाए। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि उन्हें पीएम आवास योजना के तहत अलग से घरों का आवंटन किया जाए ताकि उनकी सुरक्षा हो सके।
क्या कहते हैं आंकड़े
रत्न एवं आभूषण उद्योग के ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक तराशे गए हीरे का निर्यात अक्तूबर महीने में वार्षिक आधार पर डॉलर मद में 26.12 फीसदी और रुपये के हिसाब से 18.67 फीसदी घटा है। वजन (कैरट) के हिसाब से निर्यात में 38.58 फीसदी की कमी आई है। अक्तूबर 2021 में 19,175.16 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था, जो अक्तूबर 2022 में घटकर 15,594.49 करोड़ रुपये रह गया।
चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अक्तूबर के दौरान 1,11,400 करोड़ रुपये के तराशे गए हीरे का निर्यात हुआ, जबकि पिछले साल इस अवधि में 1,10,675.84 करोड़ रुपये के तराशे गए हीरे का निर्यात किया गया था। इस तरह रुपये के हिसाब से 0.65 फीसदी की बढ़त देखने को मिल रही है, लेकिन डॉलर के हिसाब से इसका निर्यात 5.54 फीसदी और वजन के हिसाब से 22.50 फीसदी घटा है। इस साल अप्रैल-अक्तूबर के बीच कुल 156.08 लाख कैरट तराशे गए हीरों का निर्यात किया गया। जबकि पिछले साल इस दौरान 201.39 लाख कैरट हीरे का निर्यात हुआ था। दूसरी ओर कृत्रिम हीरे यानी प्रयोगशाला में तैयार हीरे का निर्यात अक्तूबर में 1,474.38 करोड़ रुपये का हुआ। अप्रैल-अक्तूबर 2022 में इन हीरों का निर्यात बढ़कर 8,882.00 करोड़ रुपये हो गया।