संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। उद्यमिता को लेकर गोरखपुर विश्वविद्यालय, यूनिवर्सिटी ऑफ अगदर नॉर्वे और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से कार्यशाला आयोजित हुई थी। कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि प्लेसमेंट सेल की जगह “युवा-छात्र स्वावलंबन केंद्र” विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय में स्थापित होना चाहिए। भारत में 37 करोड़ बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने के लिए इतनी मात्रा में नौकरी नहीं है, युवाओं को नौकरी की मानसिकता से निकालकर उन्हें अपने स्थानीय संसाधन तथा टेक्नोलॉजी को ध्यान में रखकर उद्यम की ओर सजग और प्रेरित करना होगा।
मुख्य वक्ता प्रो. विकास के सिंह, डीन अमरकंटक विश्वविद्यालय ने 64-कलाओं आधारित सांस्कृतिक स्टार्टअप, सोलह सिंगार, हर्बल ब्यूटी- डेकोरेटिव प्रोडक्ट्स फैशन एसेसरीज, 108 जड़ी-बूटी के बारे में बतायाा। मुख्य अतिथि पद्मश्री चंद्रशेखर सिंह ने कहा कि कृषि को उद्यमिता से जोड़कर और क्वालिटी प्रोडक्ट की प्रोसेसिंग के माध्यम से बड़े पैमाने पर ग्रामीण अंचल के युवाओं को आत्मनिर्भर एवं कृषि उद्यमिता के अवसर से आर्थिक विकास की अपार संभावनाएं हैं।
आयोजन समिति सचिव डॉ. स्मृति मल्ल ने विषय प्रवर्तन किया। संचालन प्रांत मंत्री मयंक राय व आभार ज्ञापन प्रांत अध्यक्ष डॉ. राकेश प्रताप सिंह ने किया। कार्यशाला में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की विशेष आमंत्रित सदस्य प्रो. उमा श्रीवास्तव, राहुल गौड़, अमित सिंह, हरिदेव, मानस राय आदि मौजूद रहे।