दरियाई घोड़े (हिप्पोपॉटेमस) पानी में रहने वाले सबसे शक्तिशाली जानवर हैं। अफ्रीकी नस्ल के दरियाई घोड़ों ने चिड़ियाघर के वातावरण को अपना लिया है। यहां आने के बाद इनका कुनबा भी बढ़ा है। दरियाई घोड़े की एक बड़ी खासियत है कि उसका पसीना लाल रंग का होता है। यह उसे अन्य जानवरों से अलग बनाता है।
शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) में इस समय तीन दरियाई घोड़े हैं। ये अफ्रीकी नस्ल के हैं, जिन्हें कानपुर चिड़ियाघर से लाया गया था। इसमें दो नर नन्हे और माही तो एक मादा लक्ष्मी है। माही का जन्म गोरखपुर चिड़ियाघर में ही 2023 में हुआ था। इन्हें देख दर्शक काफी रोमांचित होते हैं।
चिड़ियाघर के उप निदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि दरियाई घोड़े ज्यादातर समय पानी में ही रहते हैं। पानी में रहने वाले ये सबसे शक्तिशाली जानवर हैं। इनके शरीर में जब नमी की कमी होती है, तब इनको पसीना आता है, जो गुलाबी लाल रंग का होता है।
मोटी त्वचा पानी में रहने के लिए बनाती है उपयुक्त
दरियाई घोड़े का वजन 1.5 टन और लंबाई चार मीटर तक रहती है। इसकी त्वचा मोटी और चिकनी होती है, जो उसे पानी में रहने के लिए उपयुक्त बनाती है। इसके दांत बड़े और तेज होते हैं। दरियाई घोड़े के पैर छोटे और मोटे होते हैं, जो उसे पानी में चलने और तैरने में मदद करते हैं। ये शाकाहारी होते हैं, जो घास, पत्तियां और फल खाते हैं। इनका जीवनकाल 30-40 वर्ष होता है।