स्वयं सहायता समूह के माध्यम से मछली पालन करेंगी महिलाएं
चरगांवा की पांच महिलाओं को दिया गया प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। चरगांवा ब्लॉक की महिलाएं मछली पालन में रोल मॉडल बन रही हैं। पायलेट प्रोजेक्ट के तहत जिले के चरगांवा ब्लॉक का चयन किया गया है, जहां की महिलाओं को स्वयं सहायता समूह के माध्यम से मछली पालन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। पहले चरण में पांच महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया और अब उन्होंने मछली पालन को तरक्की का जरिया बना लिया है।
चरगांवा ब्लॉक में 80 स्वयं सहायता समूह के माध्यम से 800 से अधिक महिलाओं के अलग-अलग कलस्टर बनाए गए हैं। इनमें अधिकतर समूहों को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे मछलीपालन से परिवार की आय बढ़ाएं। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से मनरेगा से तालाबों के कार्य कराए जा सकते हैं, जबकि समूहों को ही मछली पालन के लिए सरकारी तालाबों का पट्टा देने की योजना है।
नवंबर में दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास प्रशिक्षण संस्थान बक्सी तालाब लखनऊ में पांच महिलाओं को मछली पालन का प्रशिक्षण दिया गया है। उन महिलाओं ने बेहतर तरीके से मछली का कार्य शुरू किया गया है, जबकि अन्य महिलाओं को भी इससे जोड़ा जा रहा है। याेजना के अनुसार, छोटे-छोटे तालाब बनाने के लिए बैंक लोन सहित अन्य सुविधाएं दिलाई जाएंगी, जबकि नई तकनीक भी अपनाई जाएगी।
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जिंदा मछली बेचकर कमा रहीं मुनाफा
लखनऊ प्रशिक्षण में मैंने कम पानी में अधिक समय तक मछलियों को जिंदा रखने का तरीका जाना। जिंदा मछली 400 रुपये किलो बिकती है, जबकि मरी हुई मछली की कीमत 250 रुपये हो जाती है। प्लॉस्टिक के डिब्बा और पॉलीथिन में पानी भरकर मछलियों को जिंदा रखती हूं। क्षेत्र के लोग जिंदा मछली खरीदने के लिए मेरे यहां आने लगे तो मुनाफा बढ़ गया।
- रुखसार, सिक्टौर
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अब तेजी से बढ़ रहीं मछलियां
लखनऊ में प्रशिक्षण मिलने के बाद मैंने मछली पालन का तरीका बदल दिया। अब पानी की सफाई के साथ मछलियों को चारा खिलाती हूं। पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने का उपाय कर रही हूं। सही तरीके अपनाने के कारण ठंड में मछलियां मरी नहीं, जबकि पहले मछलियां मर जाती थीं और ठंड में बढ़ती नहीं थीं। मेरे समूह को तालाब का पट्टा मिल जाएगा तो हम लोग मछली पालन करेंगे।
- अनीता, बनगाई
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गड्ढे का उपयोग कर शुरू किया मछली पालन
मैं स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हूं। वहीं से मछली पालन की प्रेरणा मिली है। मेरे घर के सामने कुछ मिट्टी निकाली गई थी, उसी खेत में गड्ढे की सफाई कराकर मैंने मछली पालन शुरू किया है। जिस गड्ढे को पाटने के लिए खर्च करना था, उसी गड्ढे से अब मेरे परिवार की आय बढ़ने वाली है।
- संगीता, बनगाई
वर्जन
पायलेट प्रोजेक्ट के तहत चरगांवा ब्लॉक में महिलाओं को मछली पालन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। 80 स्वयं सहायता समूह के माध्यम से प्रोत्साहन शुरू किया गया है। इनमें अलग-अलग समूह की पांच महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। वे बेहतर तरीके से मछली पालन कर रही हैं। मछली पालन करने वाले समूहों को सरकारी योजनाओं से मदद दी जाएगी।
- महेंद्र देव, उपायुक्त स्वत: रोजगार