अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती बेलीपार के सोना देवी की बुधवार देर शाम इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। मौके पर पहुंची डॉयल 112 नंबर की पुलिस टीम ने समझाकर शांत कराया। परिजन शव लेकर चले गए।
हालांकि उन्होंने इस मामले में तहरीर देने और शिकायत करने की बात कही है। वहीं एम्स प्रशासन का कहना है कि महिला की हालत गंभीर थी
बेलीपार की रहने वाली सोना देवी (65) को सांस लेने में दिक्कत होने पर परिजन 23 दिसंबर को इलाज के लिए एम्स लेकर आए थे। सांसद रवि किशन की पैरवी के बाद किसी तरह उसे इमरजेंसी वार्ड के रेड जोन में भर्ती किया गया। सोना देवी के पौत्र सियाराम ने बताया कि हालत बिगड़ने पर आईसीयू की जरूरत पड़ी, लेकिन आईसीयू वार्ड में बेड खाली न होने की बात कहकर मरीज को रेफर किया जाने लगा।
इस पर सांसद को फिर से फोन किया गया तो उन्होंने आईसीयू में ही रहने दिया गया। इस दौरान एक्सरे कराने पर पल्मोनरी मेडिसिन विभाग में रेफर करने की बात डॉक्टरों ने बताई, लेकिन वह नहीं हुआ और न ही कोई सीनियर डॉक्टर मरीज को देखने पहुंचा। बुधवार को हालत ज्यादा बिगड़ी तो वेंटीलेटर वाले बेड पर शिफ्ट करने की बात हुई, लेकिन बेड नहीं मिला।
इस दौरान अंबु बैग से ऑक्सीजन देने का प्रयास किया गया। इलाज के दौरान ही मरीज की मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों ने 112 नंबर पुलिस को सूचना दी। पुलिस के आने के बाद घरवालों ने इलाज में लापरवाही की वजह से मरीज की मौत होने की बात कही। घरवालों ने आरोप लगाया कि जूनियर डॉक्टरों के गलत तरीके से इलाज के चलते मौत हुई है।
महिला जब अस्पताल आई थी, तभी उसकी हालत गंभीर थी। उसे सांस लेने में दिक्कत आ रही थी। पल्मोनरी मेडिसिन के सीनियर डॉक्टरों ने भी उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया था। उसे आईसीयू वाले बेड की जरूरत थी, लेकिन बेड खाली नहीं था। जब बेड खाली हुआ तो उसे प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया गया। इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई। लापरवाही बात निराधार है:
डॉ. आराधना सिंह, चेयर पर्सन मीडिया विभाग एम्स