गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) में एक पत्र आने के साथ ही मानचित्र पर आपत्ति लगने लगी है। यह पत्र है नगरीय उपभोग प्रभार शुल्क के संबंध में नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की ओर से आठ अप्रैल में यह पत्र जारी किया गया है। यह नया शुल्क कितना होगा, इसका निर्धारण अभी तक नहीं हो पाया है लेकिन जिन प्राधिकरणों में महायोजना लागू हो गई है, वहां इस बात का शपथ पत्र देना होगा कि जब यह शुल्क प्रभावी होगा तो आवेदक उसे जमा करेगा। शुल्क जमा न करने की स्थिति में मानचित्र निरस्त माना जाएगा।
नए तरह का शुल्क लगने से मानचित्र पास कराना महंगा हो जाएगा। इस बीच जिन लोगों के मानचित्र के लिए आवेदन हुआ है और पास नहीं हो सका है, उनसे शपथ पत्र लेने की तैयारी की जा रही है। शुक्रवार को जीडीए में इस बात की काफी चर्चा रही। मानचित्रों पर इसको लेकर आपत्ति लग रही है। उनसे शपथ पत्र मांगा जाएगा। शपथ पत्र लेने के साथ मानचित्र पास कर दिया जाएगा।
नहीं हो सका है निर्धारण
नगरीय उपभोग प्रभार शुल्क का निर्धारण अभी तक नहीं हो पाया है। इस तरह मानचित्र पास कराने के लिए कितनी धनराशि और देनी होगी, यह तय नहीं है। इसको लेकर संशय है। माना जा रहा है कि सभी प्राधिकरणों में महायोजना प्रभावी हो जाने के बाद इस धनराशि पर निर्णय लिया जाएगा। शपथ पत्र में इस बात का उल्लेख करना होगा कि यह शुल्क जब प्रभावी होगा तो उसी दर पर आवेदक भुगतान करेगा। ऐसा न करने की दशा में मानचित्र को निरस्त माना जाएगा।