कारीगरों से पूछने पर पता चला कि यहां ऐसे ही काम चलता आ रहा है। श्रम विभाग में पंजीकरण है। लेकिन, अग्निशमन विभाग में पंजीकरण या यंत्र की जानकारी नहीं थी। सामने हरबंश राम गली में अंबे गहना बाजार है। यह एक तीन मंजिला शॉपिंग कॉंप्लेक्स है। इसमें टंच (गलाने वाले) की दुकानें हैं। बड़ी चिमनियों में ठोस तत्व गलाकर सोने को तैयार किया जाता है।
दुकान पर प्रतिदिन हजारों ग्राहक आते हैं और आसपास सराफा की कई दुकानें भी हैं। चिमनियां धधकती हैं, लेकिन पूरे कॉंप्लेक्स पर कहीं भी अग्निशामक यंत्र नहीं है। ऐसे में अगर यहां आग लगती है तो बड़ा नुकसान हो सकता है। सराफा मंडल को ही नहीं, अग्निशमन विभाग भी इस खतरे के प्रति बेपरवाह है।
सराफा मंडल के संरक्षक पीडी जैन ने कहा कि हिंदी बाजार की सकरी गलियों में सोना गलाने और गैस सिलिंडर पर आभूषण तराशने का काम होता है। इनके पास अग्निशामक यंत्र नहीं है, यह बेहद गंभीर मामला है। सख्ती के साथ इन्हें निर्देशित किया जाएगा कि अपना व्यापार करें, लेकिन दूसरों की जान जोखिम में न डालें। अगर अग्निशमन विभाग से संपर्क कर सुरक्षा मानकों का इंतजाम नहीं किया, तो कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी एके सिंह ने कहा कि सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर अगर व्यापार हो रहा है, तो ये गलत है। फिलहाल अभी जानकारी नहीं है। बाजार में जाकर भौतिक परीक्षण के बाद कुछ कहा जा सकेगा। अगर ऐसा है तो नियमानुसार कार्रवाई के लिए निर्देशित किया जाएगा।
सराफा मंडल के पूर्व और वर्तमान पदाधिकारी भी बेफिक्र
सराफा मंडल के पदाधिकारियों की दुकानें, मंडल भवन भी हिंदी बाजार में ही है। नियमों को ताक पर रखते हुए कारीगर बाजार में दुकान खोलते गए। लेकिन, इन जिम्मेदारों की भी नजर नहीं पड़ी। वर्षों से सराफा मंडल की कार्यकारिणी गठित होती रही और बैठक तक सीमित रही। किसी जिम्मेदार ने इन दुकानों पर अग्निशमन सुरक्षा मानकों पर विचार नहीं किया। ऐसे में इस खतरे के लिए कारीगर और अन्य के साथ सराफा मंडल के पदाधिकारियों पर भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।