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कारसेवक की कहानी: ढांचा गिरा तो मलबे से घायल हो गए थे भानुप्रताप और बैजनाथ मिश्र, दोबारा पहुंचे थे अयोध्या

Tue, 16 Jan 2024 01:48 PM IST
अनुज कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर

सार

अमर उजाला से बातचीत में भानुप्रताप सिंह ने बताया कि विश्व हिंदू परिषद की तरफ से वर्ष 1990 में कारसेवा का ऐलान हुआ तो हिंदू संगठनों और भाजपा से जुड़े लोग घर से निकल पड़े थे।
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दो कारसेवकों की कहानी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिसंबर 1992 में अयोध्या पहुंचे कारसेवक लालकृष्ण आडवाणी, साध्वी ऋतुंभरा, उमा भारती जैसे नेताओं का भाषण सुनने के बाद सरयू नदी के तट पर पहुंचे और वहां से प्रत्येक कार्यकर्ता एक मुट्ठी मिट्टी लेकर मंदिर की तरफ बढ़ चला। हजारों की यह भीड़ विवादित स्थल तक पहुंचते-पहुंचते बेकाबू हो गई।

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भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की बात को अनसुना कर कर सेवक गुंबद पर चढ़ गए। इस दौरान मलबा गिरने से कई कारसेवक घायल भी हो गए थे, जिसमें पिपरौली ब्लाक निवासी कारसेवक भानुप्रताप सिंह और बैजनाथ मिश्र भी शामिल थे। इलाज के बाद ये लोग गोरखपुर लौटे थे। भानुप्रताप 22 को अयोध्या नहीं पहुंच पाएंगे तो मकर संक्रांति के दिन ही वहां जाकर हुए बदलाव को देख आए।

अमर उजाला से बातचीत में भानुप्रताप सिंह ने बताया कि विश्व हिंदू परिषद की तरफ से वर्ष 1990 में कारसेवा का ऐलान हुआ तो हिंदू संगठनों और भाजपा से जुड़े लोग घर से निकल पड़े थे। आडवाणी जब रथयात्रा लेकर निकले तो उनके स्वागत की योजना बनी। लेकिन, जब आडवाणी की गिरफ्तारी हो गई तो अयोध्या जाकर कारसेवा का निर्णय लिया गया। उस समय मुरारी इंटर कालेज के प्रिंसिपल रहे हरिनारायण सिंह के निर्देश पर तैयारी की गई। 
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भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ.रमापतिराम त्रिपाठी ने पिपरौली ब्लाक के कार्यकर्ताओं को कारसेवा के लिए भेजा। 30 अक्तूबर को अयोध्या जाने के लिए वह 104 लोगों के साथ पांच जत्थे में वे लोग पैदल ही निकले। बस्ती जिले में कलवारी के पास नदी पार करना था। रातभर चलकर सुबह एक गांव में रुकना था। लेकिन मगहर के पास सभी गिरफ्तर हो गए।

गिरफ्तार कारसेवकों को आजमगढ़ जिले के चंडेसर कालेज में बने अस्थायी जेल में बंद कर दिया गया। जेल से छूटने के बाद वे लोग फिर आंदोलन में जुड़कर लोगों को जागरूक करने लगे। इसके बाद वर्ष 1992 के दिसंबर महीने में हुई कारसेवा के दौरान भी भानुप्रताप सिंह बैजनाथ मिश्रा, गोपाल गुप्ता, कौशल, गणेश और भूपेंद्र सिंह के साथ अयोध्या अयोध्या पहुंच गए।

आडवाणी-ऋतुंभरा के भाषण से बढ़ा जोश
अयोध्या पहुंचे कारसेवक शाम को लालकृष्ण आडवाणी, साध्वी ऋतंभरा, उमाभारती, आचार्य धर्मेंद्र, महंत अवेद्यनाथ जैसे नेताओं का भाषण होता था। 5 दिसंबर को कहा गया कि सभी कारसेवक सरयू नदी से एक मुट्ठी रेत लाकर प्रतीक कारसेवा करेंगे। लेकिन, सरयू से रेत लेकर कारसेवक चले तो भीड़ गुंबद पर चढ़ गई। मलबा की चपेट में आकर भानु प्रताप और बैजनाथ मिश्रा घायल हो गए। अन्य कारसेवक उन्हें श्रीराम हास्पिटल ले गए, जहां उपचार किया गया। दूसरे दिन अन्य साथी गोरखपुर ले आए। विनय कटियार समेत कई वरिष्ठ नेता भी अस्पताल आए थे।

कारसेवकों के रुकने के लिए बनी थी पर्ची की व्यवस्था
विहिप के तत्कालीन संगठन मंत्री संजय आरएसएस के स्वयं सेवक रहे हैं। वर्ष 1990 में जब आडवाणी रथयात्रा लेकर निकले तब उन लोगों को कारसेवकों को प्रेरित कर अयोध्या भेजने को कहा गया था। उन लोगों को एक पर्ची मिली थी। उस पर्ची पर गुलाब सिंह परिहार का हस्ताक्षर था। परिहार उस समय राम जन्म भूमि पूजन समिति के संयोजक थे। पर्ची के आधार पर ही कारसेवकों को अयोध्या में रुकने का स्थान मिलता था। दिसंबर 1992 की कारसेवा के दौरान महाराष्ट्र से एक दंपति आया था, जिसके छोटे बच्चे की कारसेवा के दौरान मौत हो गई थी। महिला अपने बच्चे के शव को जन्मभूमि का स्पर्श कराने लेकर जा रही थी।

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