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Gorakhpur News: अब तक 470 मिमी बारिश.. अगस्त में टूटा छह वर्षों का रिकॉर्ड

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गोरखपुर। अब तक अगस्त में करीब 470 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। यह अबतक की सर्वाधिक बारिश है। पिछले छह वर्ष का रिकार्ड टूटा है। जानकार बताते हैं कि अगस्त में औसतन 319.5 मिलीमीटर बारिश होती है। हालांकि जिले में जून और जुलाई में औसत से कम बारिश हुई थी।
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उधर चार दिनों से हो रही बारिश पर शनिवार पर चटक धूप ने ब्रेक लगा दी। हालांकि शुक्रवार की रात में हुई झमाझम बारिश से खड़ी मुसीबत से लोगों को जूझना ही पड़ा। शहर कई इलाके लबालब पानी में डूबे रहे। वहीं, छतों पर सूखते कपड़े धूप निकलने से मिली राहत की गवाही दे रहे थे। इससे पारे में भी उछाल दिखा। शनिवार को दिन में अधिकतम तापमान 32.8 व न्यूनतम 24.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

जून में औसतन 173.7 व जुलाई में 397.4 मिमी बारिश दर्ज किया गया है। इसके सापेक्ष इस वर्ष जून में 51 व जुलाई में 312.2 मिमी बारिश हुई थी। अन्य वर्षों की तरह इस वर्ष में मानसून अगस्त में मेहरबान रहा। इधर चार-पांच दिनों से रुक-रुक कर बारिश होती रही। शुक्रवार की सुबह 8.30 बजे से शनिवार की सुबह 8.30 बजे तक 44.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके साथ ही अबतक अगस्त में 470 मिमी बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से करीब 150 मिमी अधिक है। जिले में 26 अगस्त तक औसतन 312 मिलीमीटर बारिश होती है। अगस्त में बारिश ने अबतक का अपना छह वर्ष का रिकार्ड तोड़ दिया है।
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अगस्त में बारिश की स्थिति



वर्ष..............बारिश



2017..............354



2018..............367.1



2019..............76.1



2020..............133.8



2021..............440.9



2022..............258.8



2023.............470 (अबतक)







चार माह में औसतन होती है 1144 मिमी बारिश



मौसम विभाग के अनुसार जून, जुलाई, अगस्त व सितंबर में औसतन 1144 मिमी बारिश दर्ज की गई है। इसके सापेक्ष अबतक तीन माह में 840 मिमी बारिश हो चुकी है।







मौसम के मिजाज ने बदल दिया अंचल का फसल चक्र



खेतों में पानी भरने से अरहर का रकबा घटा

अब किसान बोने लगे हैं धान-गेहूं



संवाद न्यूज एजेंसी



गोरखपुर। मौसम के बदले मिजाज ने अंचल का फसल चक्र बदल दिया। कभी इस क्षेत्र के किसान नकदी के लिए दलहन की फसलों अरहर, मसूर और मटर की बुआई करते थे। लेकिन, अधिक बारिश होने के कारण दलहन की फसलों का सर्वाधिक नुकसान होने लगा। इसलिए यहां के किसानों ने खतरा मोल लेने की जगह धान और गेहूं की फसल बोने लगे हैं। किसानों का कहना है कि भले ही मुनाफा कम हो, दलहन की बुआई कर नुकसान नहीं उठाना है।



अरहर की फसल एक साल की होती है। खरीफ में इसकी बुआई की जाती है। पहले गोरखपुर सहित अंचल में अरहर की बुआई अधिक मात्रा में होती थी, लेकिन कुछ सालों में अत्यधिक बारिश के कारण अरहर की फसल सूख गई। इससे किसानों का अरहर से मोहभंग हो गया। दरअसल, अरहर की फसल पानी से खराब हो जाती है। डुमरैला के किसान हरिशंकर कहते हैं, खेत में पानी लग जाने से अरहर की फसल सूख गई। मटर और मसूर की बुआई भी अब नहीं करते हैं। जिला कृषि अधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह भी किसानों की इस समस्या से इत्तेफाक रखते हैं।

कृषि वैज्ञानिक डॉ एसके तोमर ने बताया कि विगत पांच-छह सालों से मौसम का मिजाज एक दम बदल गया है। जरूरत से ज्यादा बारिश हो रही है। इससे केवल धान की खेती ही हो पा रही है।
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