- राप्ती नदी में गिरने वाले नालों का प्राकृतिक विधि से होगा शोधन
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। तकियाघाट और इलाहीबाग नाले के पानी की प्राकृतिक विधि से सफाई का कार्य शुरू है। बरसात से पहले इसे हर हाल में पूरा करना है। रविवार को मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने मुख्य अभियंता संजय चौहान संग इसका निरीक्षण किया। इस दौरान पाया कि अब धीरे-धीरे पानी की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।
पर्यावरणविद प्रो. सीआर बाबू की सलाह पर तकियाघाट नाले के प्रदूषित जल को प्राकृतिक विधि (फाइटोरेमीडिएशन) से ट्रीट कर राप्ती नदी में डाला जाएगा। नाले के अंदर 50-100 मीटर की दूरी पर समान पत्थर की चिनाई वाली दीवार का बनाई जा रही है। जहां पर यह दीवार बन गई है वहां पानी साफ होकर आगे जा रहा है। बीच-बीच में नाले के तल में पत्थर बिछाए जा रहे हैं। जहां नाला कच्चा है वहां निर्मित आर्द्रभूमि प्रणाली विकसित की जा ही है। ऐसे स्थान पर विभिन्न प्रकार के जलीय पौधे लगाए जा जाएंगे। ताकि पत्थर और पौधों से गुजरते हुए पानी स्वत: साफ हो जाए। उसके बाद नदी में डाला जाएगा।
मुख्य अभियंता संजय चौहान ने बताया कि तकिया घाट नाले के पानी का प्राकृतिक विधि से शोधन का कार्य शुरू हो गया है। इसके पानी की गुणवत्ता में अब सुधार हो रहा है। स्थल पर लगभग 30 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। बरसात से पहले इस कार्य को हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। नालों के पानी को कंस्ट्रक्शन वेटलैंड सिस्टम (सीडब्ल्यूएस) से शोधन किए जाने से जल प्रदूषण एवं वायु प्रदूषण की समस्या से निजात मिलेगी।