ईद-उल-अजहा (बकरीद) की तैयारी तेज हो चुकी है। हज के लिए जहां यात्रियों का जत्था रवाना हो चुका है, वहीं अब शहरवासी कुर्बानी की तैयारियों में जुट गए हैं। वैसे तो गोरखपुर में दो-तीन दिन पहले बकरों की मंडी लगेगी, लेकिन सस्ते और अच्छे बकरों की चाह में लोगों ने अभी से गांवों की दौड़ लगानी शुरू कर दी है।
गोरखपुर और आसपास के जिलों से वह बकरों को देखने के लिए पहुंच रहे हैं और पसंद आने पर खरीदने के लिए पेशगी यानि एडवांस में रकम भी दे रहे हैं। बकरीद में कुर्बानी का सिलसिला 17 जून से शुरू हो जाएगा।
ईद-उल-अजहा हजरत इब्राहिम की अजीम कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। दुनिया भर में लोग इससे जोश-खरोश के साथ मनाते हैं। साहबे हैसियत व्यक्ति पर कुर्बानी फर्ज है। ऐसे में सभी इसकी तैयारियों में जुट गए हैं। गोरखपुर के गांवों के साथ ही संतकबीरनगर, महराजगंज, कुशीनगर और देवरिया के आसपास के गांवों में जाकर बकरे देखने का सिलसिला भी शुरू हो गया है।
अपने साप्ताहिक अवकाश या छुट्टियों में जाकर लोग बकरों को पसंद कर रहे हैं। छोटेकाजीपुर के रहने वाले हसीब रहमान ने बताया कि आसपास के गांवों में जाने का मकसद यह है कि वहां पर अपने हिसाब से चुनकर बकरे खरीदे जा सकते हैं। वहीं इनकी कीमत भी अभी बजट के हिसाब से मिल जाएगी।
इसके साथ ही बकरों को घर रखकर उन्हें खिलाने के बाद कुर्बानी करने का सवाब भी ज्यादा है। वहीं, मदरसा चौराहा के रहने वाले शबीहउद्दीन की मानें तो उनका गांव कुसम्ही के पास है। वह वहीं से बकरा ले लेते हैं। उन्हें वहां अच्छा बकरा मुनासिब रेट में मिल जाता है।
बकरे के व्यापारी चुन्ना की मानें तो बाजारों में अब बकरों को बकरीद के लिए रोका जाने लगा है। बस बाजार की मांग के हिसाब से ही बकरे लाए जा रहे हैं। बाकी कुर्बानी के बाजार के लिए रखे गए हैं। कुछ दिन बाद इन्हीं बकरों के अच्छे दाम मिलने लगेंगे।
गर्मी से बकरों का नुकसान
गोरखपुर और आसपास के जिलों में गोट फॉर्मिंग का क्रेज बढ़ा है। लोग बकरी पालन कर रहे हैं, जिससे कि अच्छा मुनाफा कमाया जा सके। कुर्बानी के लिए कम से कम एक साल का बकरा होना जरूरी है। ऐसे में बकरी के बच्चों को लाकर उसे एक साल तक पाला जाता है और फिर उसे मुनाफे के साथ बेच दिया जाता है।
इस बार भीषण गर्मी से उन्हें नुकसान होने लगा है। बकरी फॉर्म के मालिक मोहम्मद आरिफ ने बताया कि उन्होंने अपने गांव सिंगारपुर में बकरी का फॉर्म डाला। इसकी देखरेख के लिए केयर टेकर रखा। मगर फायदे के बजाए उन्हें नुकसान उठाना पड़ा।
उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी और हीट वेव की वजह से कई बकरियों की मौत हो गई। जबकि बकरियों को एक साल से ज्यादा समय से पाल रखा था। अब जब उन्हें बेचने का समय आया तो उनकी मौत से नुकसान हो गया। करीब 18 में से 5-6 बकरियां मर चुकी हैं। अब वह उन्हें जल्दी बेचने के प्रयास में हैं।