गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के नए कुलपति को लेकर जोर-आजमाइश तेज हो गई है। राजभवन की ओर से नामित तीन सदस्यीय कमेटी दूसरे चरण में सभी 15 आवेदनों में से पांच का चयन कर कुलाधिपति को भेजेगी। कुलाधिपति साक्षात्कार के बाद एक नाम पर मुहर लगाएंगी। माना जा रहा है कि वर्तमान कुलपति का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही नए कुलपति के नाम की घोषणा हो जाएगी।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति प्रो.राजेश सिंह का कार्यकाल पांच सितंबर को पूरा हो रहा है। इससे विवि परिसर में नए कुलपति को लेकर चर्चा चरम पर है। कयासबाजी भी खूब हो रही। यह यूं ही नहीं है, कहीं न कहीं इसके पीछे की वजह कुलपति के चयन को लेकर राजभवन की सक्रियता भी है। राजभवन की ओर से पहले चरण में 350 आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इसमें से 90 आवेदन छांटने के बाद 15 आवेदकों के साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इनमें 20 ऐसे आवेदक भी शामिल हैं, जो वर्तमान में किसी न किसी विश्वविद्यालय में कुलपति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। सूत्रों की माने तो इसमें वर्तमान कुलपति प्रो. राजेश सिंह भी शामिल हैं।
गोविवि के प्रोफेसरों ने भी की है दावेदारी
वैसे तो उम्मीद कम ही है कि विश्वविद्यालय का कोई शिक्षक यहां का कुलपति बनाया जाए। बावजूद इसके दर्जन भर से अधिक प्रोफेसरों ने आवेदन किया है। चूंकि आवेदन के लिए बतौर प्रोफेसर कोई अवधि राजभवन की ओर से निर्धारित नहीं है, इसलिए आवेदनकर्ताओं की सूची में जूनियर से लेकर सीनियर प्रोफेसर तक शामिल हैं।
लखनऊ, प्रयागराज व वाराणसी के सर्वाधिक आवेदक
गोरखपुर विश्वविद्यालय का कुलपति बनने के लिए सर्वाधिक रुचि लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर व वाराणसी के प्रोफेसरों ने दिखाई है। सूत्रों की माने तो आवेदकों में सर्वाधिक संख्या इन्हीं जिले के विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों की है। 50 के करीब आवेदक प्रदेश के बाहर के हैं।