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Gorakhpur News: पीसीएस अफसर बताकर झांसे में लेते थे, गोरखपुर में की थी दो करोड़ की ठगी

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जालसाज दंपती खुद को सीएम योगी का भी बताते थे करीबी, पुलिस ने लगाया था गैंगस्टर
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एम्स में दवा की दुकान, पार्किंग और कैंटीन का ठेका दिलाने के नाम पर की थी जालसाजी



अमर उजाला ब्यूरो



गोरखपुर। देवरिया में गिरफ्तार किए गए राजीव तिवारी व शिप्रा तिवारी ने गोरखपुर के युवाओं से दो करोड़ रुपये की ठगी की है। लोगों को झांसे में लेने के लिए शिप्रा पति राजीव को पीसीएस अधिकारी बताती थी। साथ ही यह भी कहती थी कि वे सीएम योगी के करीबी हैं। गोरखनाथ मंदिर के एक पदाधिकारी के रिश्तेदार हैं। उन्हीं की मदद से ठेका दिलवा देंगे।



जालसाज दंपती ने एम्स के कैंटीन, दवा की दुकान और पार्किंग का ठेका दिलाने के नाम पर ठगी की थी। पहला मामला गोरखनाथ इलाके में 34 लाख रुपये जालसाजी का आया था। इसके बाद कई केस दर्ज किए गए। कैंट पुलिस ने आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई भी की थी।
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जानकारी के मुताबिक, ठगी के शिकार बेलीपार निवासी महेंद्र नाथ गुप्ता ने पहला केस दर्ज कराया था। उसने बताया कि जोखन गुप्ता के जरिए उनकी मुलाकात चिलुआताल के गायत्रीपुरम निवासी राजीव तिवारी से हुई। राजीव ने उनसे बताया कि वह पीसीएस अधिकारी है। गोरखनाथ मंदिर का कामकाज देखने वाले एक पदाधिकारी के रिश्तेदार भी है। जल्द ही उसकी पोस्टिंग गोरखपुर में नगर आयुक्त के पद पर हो जाएगी।



इससे महेंद्र को राजीव की बात पर भरोसा हो गया। महेंद्र ने बताया कि वह व्यापार करने के लिए जगह की तलाश कर रहे थे। यह जानने के बाद राजीव तिवारी ने बताया कि एम्स का एक अस्पताल बन रहा है और निदेशक उसके साढ़ू हैं। इसलिए वह महेंद्र को एम्स के कैंटीन, दवा की दुकान और पार्किंग का ठेका दिला देगा। इसके लिए राजीव ने महेंद्र से 34 लाख रुपए मांगे। महेंद्र ने जमीन बेचकर कई बार में खाते में आरटीजीएस, नकद मिलाकर कुल 34 लाख रुपए दे दिए।



बाद में जालसाजी की जानकारी होने पर महेंद्र ने रकम वापस मांगी। इसके बाद राजीव ने स्टांप पर लिखकर वादा किया कि वह रकम लौटा देगा। उसने एक चेक भी दिया, लेकिन वह बाउंस हो गया। इसके बाद महेंद्रनाथ गुप्ता की शिकायत पर कैंट पुलिस ने चिलुआताल के गायत्रीपुरम निवासी राजीव तिवारी और उसकी पत्नी शिप्रा तिवारी पर केस दर्ज किया। इसके बाद कई और मामले सामने आए और पुलिस ने गैंगस्टर की कार्रवाई की थी।







पहले भी एम्स में नौकरी के नाम पर हुई है जालसाजी



18 जनवरी 2023 : कुशीनगर जिले के हनुमानगंज, छितौनी वार्ड नंबर सात निवासी प्रमोद उपाध्याय ने बेलीपार के कनइल गांव निवासी राजेश शुक्ल ने एम्स में नौकरी दिलाने का झांसा देकर जालसाजी करने का केस दर्ज कराया। आरोपी जेल भेजा गया।



09 जनवरी 2023 : कैंट पुलिस ने एम्स में नौकरी के नाम पर 17 लाख रुपये की ठगी करने के आरोपी को जेल भेजा था। आरोपी ने महराजगंज के फरेंदा के सेखुई निवासी कन्हई प्रसाद से रुपये लेकर फर्जी नियुक्तिपत्र भी दिया था।



21 फरवरी 2023 : गुलरिहा थाना क्षेत्र के बिस्टौली निवासी सुनेसर ने सीएम से जनता दरबार में शिकायत की थी। बताया था कि चिलुआताल क्षेत्र में रहने वाली उसकी बहन हेवंती देवी मेडिकल कॉलेज में सफाईकर्मी है। उसने तीन लोगों के साथ एम्स में नौकरी के नाम पर जालसाजी की।



20 अप्रैल 2023 : पीपीगंज निवासी वीरेंद्र व दुर्गेश सहित छह युवकों ने कैंपियरगंज थाना क्षेत्र के राखुखोर निवासी रहमान पर केस दर्ज कराया। आरोप है कि एम्स में नौकरी लगवाने के नाम पर रुपये लिए गए और फर्जी नियुक्तिपत्र थमा दिया गया।



02 सितंबर 2021 : धर्मपुर के त्रिभुवन नाथ ने एम्स में नौकरी के नाम पर जालसाजी करने के आरोपी दंपती पर केस दर्ज कराया। इन दोनों ने रुपये लेकर लौटाने से मना कर दिया था। पुलिस ने कार्रवाई की।



30 जुलाई 2022 : एम्स में नौकरी के नाम पर 35 लोगों से 70 लाख रुपये की जालसाजी करने के आरोप में चार महिलाओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। महिलाओं ने सभी को नर्स व दाई की नौकरी दिलाने का वादा किया था।
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02 दिसंबर 2022 : खोराबार निवासी सरिता ने एम्स में नौकरी के नाम पर जालसाजी का केस दर्ज कराया। जांच में सामने आया कि 50 से अधिक लोगों से 19 लाख रुपये की ठगी की गई।
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