जगदीशपुर जंगल कौड़ियां रिंग रोड का मामला
गांवों में जाकर लोगों को समझा रहे कर्मचारी, बता रहे फायदे
सहमत नहीं हो रहे ग्रामीण, मान मनौव्वल से सुलझेगा मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
जगदीशपुर (गोरखपुर)। जगदीशपुर जंगल कौड़िया रिंग रोड के लिए अधिग्रहित जमीनों का मुआवजा तय नहीं हो पा रहा है। 26 गांवों के किसानों के पास पहुंचकर एसएलओ और एनएचएआई के कर्मचारी जमीनों के दस्तावेज देने की गुहार लगा रहे हैं। कागजी कोरम के अभाव में किसानों की जमीन का हिस्सा तय नहीं हो पा रहा है। इससे मुआवजे की रकम को लेकर पेच फंसा हुआ है। सीआरओ ने बताया कि जमीन अधिग्रहण के मामले को सुलझाने के लिए किसानों को इसके फायदे बताए जा रहे हैं।
जगदीशपुर जंगल कौड़िया रिंग रोड के लिए जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया है, लेकिन किसानों के मुआवजे का भुगतान नहीं हो सका है। मई में किसानों काे मुआवजा दिलाने के लिए एसएलओ (विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी), एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) और राजस्व कर्मचारियाें की टीम ने गांवों में शिविर लगाकर सहमति पत्र भरने को कहा, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। इसके बाद बीते बुधवार को एनएचएआई के ठेकेदार की ओर से गांवों में प्रचार कराया गया। लाउडस्पीकर के सहारे कोनी, मठिया, रमवापुर सहित अन्य गांवों में जाकर जमीनों के दस्तावेज जमा कराने को कहा गया, लेकिन किसान आगे नहीं आए। अब एसएलओ और एनएचएआई के कर्मचारी गांवों में पहुंचकर लोगों से व्यक्तिगत बात कर रहे हैं। ताकि लोग इसके लिए रजामंद हो जाए। कैथवलिया सहित अन्य गांवों में जाकर कर्मचारी लोगों से मिल रहे हैं। यह भी बता रहे हैं कि बिना कागज दिए आगे की कार्रवाई कैसे पूरी हो जाएगी।
कुछ किसानों ने एसएलओ से शपथ पत्र ले लिया है। लेकिन इसे भरकर जमा करने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं। सोमवार तक किसी किसान ने शपथ पत्र नहीं जमा कराया था। दस्तावेज जमा कराए बिना किसानों के जमीन का हिस्सा तय नहीं हो पाएगा। उधर, मुआवजा नहीं मिलने पर कुछ किसानों ने रिंग रोड की जमीन पर धान रोप दिया है।
मुआवजे का प्रकरण सुलझाने के लिए किसानों से बातचीत की जा रही है। किसानों को रिंग रोड के फायदे के बारे बताया जा रहा है। उनको प्रक्रिया पूरे करने के संबंध में जागरूक किया जा रहा है। जल्द ही इसका हल निकाल लिया जाएगा।
सुशील कुमार, सीआरओ/एसएलओ