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Gorakhpur News: सर्दी से बचाव के लिए गर्दन पर बढ़ा बोझ तो सर्वाइकल के दर्द ने किया परेशान

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- ओपीडी में दो गुने से अधिक बढ़ गए हैं सर्वाइकल के मरीज
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- गलत तरीके से सोने, बैठने ही नहीं, कपड़े और हेलमेट के वजन से भी गर्दन पर पड़ता है दबाव

अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। इतनी ठंड से बचाव के लिए हर आदमी कोट, टोपी, मफलर का सहारा ले रहा है, लेकिन इससे गर्दन पर बोझ बढ़ रहा है। जिन्हें पहले से सर्वाइकल की दिक्कत है, ऐसे लोगों का इसका दर्द फिर शुरू हो जा रहा है। हड्डी रोग के डॉक्टरों की ओपीडी में गर्दन के दर्द के मरीजों की संख्या में लगभग दो गुनी की वृद्धि हो गई है।
पीपीगंज इलाके के रहने वाले राकेश श्रीवास्तव को कुछ दिन से गर्दन में दर्द और चक्कर आने की शिकायत हुई तो वे डॉक्टर से परामर्श लेने पहुंचे। डॉक्टर ने उन्हें भारी भरकम पहनावा से बचने की सलाह देने के साथ ही एक सप्ताह के लिए दवा और कुछ व्यायाम बताए। असुरन इलाके के रहने वाले चंद्रशेखर को भी ऐसी ही दिक्कत थी। डॉक्टर के पास पहुंचे तो पता लगा कि टोपी के ऊपर से मफलर लपेटने के चलते गर्दन पर दबाव पड़ने लगा था। दरअसल करीब एक महीने से कड़ाके की ठंड पड़ रही है। ठंड से बचाव के लिए आमतौर पर कालर वाली जैकेट, कोट, ओवरकोट को लोग बेहतर मानते हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इससे गर्दन पर दबाव बढ़ रहा है।
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सर्वाइकल के ये हैं प्रमुख कारण

0 गर्दन की हड्डी व मांसपेशियों का कमजोर होना।
0 ठंड की वजह से मांसपेशियों का सिकुड़ना, जिससे रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ता है।
0 गलत तरीके से सोना जैसे, रजाई, तकिया के साथ हाथ-पैर व गर्दन मोड़कर सोना।
0 कई भारी कपड़े पहनना, जिससे गर्दन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
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कोट
जाड़े में लोग अक्सर कई कपड़े पहनते हैं, ऊपर से टोपी-मफलर, शॉल आदि भी होता है। इनसे गर्दन पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है, जिससे गर्दन आगे की तरफ हल्की सी झुक जाती है। ठंड से मांसपेशियों में सिकुड़न भी होती है, जिससे रीढ़ की हड्डी पर पहले से ही दबाव बढ़ा होता है। कई दिन तक धूप नहीं होने से विटामिन डी भी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता। ये सारी स्थितियां मिलकर सर्वाइकल के मामले बढ़ा रही हैं। लोगों को सलाह दी है जाती है कि इनर, स्वेटर जैसे कपड़े अधिक पहनें, जिससे कि गर्दन पर कम से कम दबाव हो। इसके अलावा घर में ही हल्के व्यायाम करें और अपने सोने, बैठने, मोबाइल या लैपटॉप का प्रयोग करने के दौरान इस बात का ख्याल रखें कि गर्दन पर कम से कम दबाव पड़े।

डॉ. ऋतेश, हड्डी एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ
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