जेनेटिक स्पाइनल मस्कुलर अट्रोफी से पीड़ित थी, एम्स दिल्ली में चल रहा था इलाज
एम्स नई दिल्ली के डॉक्टरों ने इलाज के लिए दिया था 16 करोड़ का प्रस्ताव
संवाद न्यूज एजेंसी
जंगल कौड़िया (गोरखपुर)। जेनेटिक स्पाइनल मस्कुलर अट्रोफी की दुर्लभ बीमारी से जूझ रही तीन साल की गौरी सिंह की सोमवार को मौत हो गई। जंगल कौड़िया क्षेत्र के बेलघाट खुर्द गांव की गौरी सिंह की जान बच सकती थी, अगर उसे एक इंजेक्शन लग जाता, लेकिन उसकी कीमत 2.125 मिलियन डॉलर (करीब 16 करोड़) है। धन के अभाव में परिजन, बच्ची को यह इंजेक्शन नहीं लगवा पाए।
इस इंजेक्शन का प्रस्ताव एम्स नई दिल्ली से प्राप्त हुआ था। चिकित्सकों ने परिजनों को चेताया था कि अगर शीघ्र ही गौरी को इंजेक्शन नहीं लगाया गया तो उसकी जान जा सकती है।
ग्राम प्रधान माता किरन सिंह और पिता पारसध्वज सिंह (मंडल उपाध्यक्ष भाजपा) धन के अभाव में इलाज कराने में असमर्थ थे। उन्होंने सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं से मदद की गुहार लगाई। कई जनप्रतिनिधियों से भी मिले, लेकिन सरकारी तंत्र और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता के चलते एक साल तक इलाज के लिए धन प्राप्त नहीं हुआ और सोमवार की सुबह बीमारी के चलते गौरी की मौत हो गई।
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इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। मेरे कार्यकाल के दौरान न तो परिजन मिले और न ही इलाज में धन की जरूरत के लिए कोई पत्र ही मिला। जिस बीमारी की बात कही जा रही है, अभी उसके इलाज पर खोज चल रही है।
डॉ आशुतोष दुबे, सीएमओ