गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध तीन कॉलेजों ने संचालन बंद करने के लिए आवेदन किया है। कारण है परंपरागत पाठ्यक्रमों में प्रवेश न मिलना और शिक्षा व्यवस्था में हुए बड़े बदलाव। विद्यार्थियों की घटती संख्या की वजह से उन्होंने संबद्धता निरस्त के लिए आवेदन किया। इसकी वजह शिक्षा की नई प्रणाली सीबीसीएस है, जो ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियोें को काफी जटिल लग रही है।
संचालन बंद करने के लिए आवेदन देने वालों में दुलारी देवी महाविद्यालय, भीखमपुर रोड, देवरिया, डाॅ. श्याम नारायण राय महाविद्यालय, गोला बाजार, गोरखपुर और बौद्धिस्ट इंस्टीट्यूट महिला महाविद्यालय बनगांवां, सहजनवां, गोरखपुर हैं। इसके पहले तीन कॉलेज बंद हो चुके हैं। दो कॉलेज ऐसे हैं जिन्हाेंने संचालन बंद करने के लिए आवेदन किया था और अब अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के पासआउट होने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने नया प्रवेश लेना बंद कर दिया है।
और भी काॅलेज बंद होने के कगार पर
प्रवेश न मिलने से विश्वविद्यालय से संबद्ध कई ऐसे कॉलेज हैं जो बंद होने की कगार पर हैं। 40 काॅलेज ऐसे हैं, जिनमें छात्रों की संख्या 100 से कम हो गई है। इनमें से 10 काॅलेजों में छात्र संख्या 25 तक पहुंच गई है। 100 से कम छात्र संख्या वाले सबसे ज्यादा 29 काॅलेज गोरखपुर के हैंं। देवरिया के आठ और कुशीनगर के तीन काॅलेजों में यह स्थिति है।
बंद हो चुके हैं ये कॉलेज
प्रवेश न मिलने की वजह से प्रज्ञा महाविद्यालय नरचोचवां कुशीनगर, बाबू सुरेंद्र सिंह महिला महाविद्यालय कुशीनगर और
बच्ची देवी महिला महाविद्यालय कौड़ीराम गोरखपुर में पहले ही ताला लग चुका है। इसके साथ ही परमेश्वर महाविद्यालय मेडिकल काॅलेज रोड गोरखपुर और राम मनोहर लोहिया महाविद्यालय सतरांव देवरिया को अंतिम वर्ष की पढ़ाई पूरी होने का इंतजार है। इसके बाद इनमें भी ताला लग जाएगा।
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कोट...
काॅलेजों में छात्र संख्या घटना चिंताजनक है। इसे बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उसी को देखते हुए इस बार केंद्रीयकृत प्रवेश प्रक्रिया अपनाई गई है। इससे कुछ कॉलेज जुड़े हैं जिनकी प्रवेश काउंसिलिंग विश्वविद्यालय के साथ होगी।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति