शहर और आसपास के इलाकों में अवैध प्लाटिंग में सड़क और पार्कों के नाम पर स्टांप चोरी से करोड़ों के राजस्व का चूना लगाया गया है। यह खेल अब अंश निर्धारण के सर्वे में खुल रहा है। अवैध कॉलोनियों के खिलाफ चलाए गए अभियान में जीडीए ने शहर में करीब 100 अवैध कॉलोनियों को चिह्नित किया है। इसमें से 49 के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा चुकी है। शेष 51 अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
रियल टाइम खतौनी से प्राइवेट कॉलोनाइजर्स की ओर से विकसित कॉलोनियों में अंश निर्धारण का खेल खुलकर सामने आ गया है। वह एक निर्धारित भूखंड पर प्लाटिंग कर रास्ता व पार्क के लिए अलग जमीन दिखा कर प्लाट को बेच देते हैं। रास्ता और पार्क के जमीन की कीमत अंश व प्लाट लेने वालों से तो वसूल लेते हैं, लेकिन खुद वह रास्ता व पार्क की जमीन की स्टांप की चोरी कर राजस्व को चूना लगाते हैं।
यही नहीं, कुछ जगहों पर तो बाद में पार्क के लिए निकाली गई जमीन को भी बेचने का मामला प्रकाश में आ चुका है। कॉलोनाइजर्स या प्रापर्टी डीलर जमीन को बेच कर खुद तो मालामाल हो जाते हैं, लेकिन उस भूमि की स्टांप की चोरी कर राजस्व का चूना लगाते हैं।
कलक्ट्रेट के अधिवक्ता रघुवंश मणि त्रिपाठी ने बताया कि एक कॉलोनाइजर्स अगर 10 एकड़ में प्लाटिंग करता है तो कम से कम 20 से 25 प्रतिशत जमीन वह रास्ता व पार्क आदि में निकाल देता है। कॉलोनी में रास्ता व पार्क दिखाकर वह उस प्लाटिंग को बेचता है, लेकिन उस रास्ता व पार्क की भूमि का अंश व अलग-अलग कटे प्लाॅट में जोड़कर प्लाॅट लेने वाले से रकम पूरा वसूल लेता है।
शहर से सटे इलाके में अगर प्लाटिंग हुई है तो एक डिसमिल के सर्किल रेट के अनुसार, स्टांप करीब 25 हजार रुपये का होता है। ऐसे में 20 डिसमिल जमीन की स्टांप चोरी कर वह करीब पांच लाख स्टांप की चोरी करता है। ऐसे में वह 10 एकड़ में करीब 50 लाख रुपये के स्टांप की चोरी कर राजस्व को चूना लगा देता है।
49 अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त कर चुका है जीडीए
जीडीए लगातार अवैध प्लाटिंग को चिह्नित कर कार्रवाई में जुटा है। जीडीए से मिली जानकारी के अनुसार, शहर को चार जोन में बांट कर 100 अवैध कॉलोनियों को चिह्नित किया गया है। इसमें 40 अवैध कॉलोनियों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा चुकी है। शेष 51 अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है।
जीडीए उपाध्यक्ष आनंद वर्द्धन ने बताया कि प्राइवेट कॉलोनाइजर्स अगर जीडीए से लेआउट तैयार कराकर कॉलोनी को विकसित करेंगे तो वे निर्धारित भूखंड के करीब 60 प्रतिशत हिस्से में ही प्लाटिंग कर सकते हैं। शेष भूखंड में ग्रीन लैंड, रास्ता व पार्क के लिए निर्धारित किया जाता है। इसके बाद उसे रेरा से भी अनुमति लेनी पड़ती है। अवैध कॉलोनियों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है।