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Gorakhpur News: चीनी लहसुन के बिक्री पर लगेगी रोक, मंडी समिति की जांच टीम गठित

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बिक्री पर रोक नहीं लगी तो विरोध-प्रदर्शन कर सकते हैं व्यापारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। शहर के साहबगंज व आस-पास के क्षेत्रों में चीन के लहसुन की बिक्री पर रोक लगाने के लिए मंडी सचिव ने मंगलवार को दो सदस्यीय टीम गठित की है। टीम में दो मंडी इंस्पेक्टर को रखा गया है, जो जांच कर रिपोर्ट मंडी सचिव को सौंपेंगे। उधर, मंडी के व्यापारियों ने चीन के लहसुन की बिक्री पर रोक लगाने के लिए अब आंदोलन की रणनीति बनाई है। उनका कहना है कि अगर रोक नहीं लगी तो वे विरोध-प्रदर्शन करेंगे।
नेपाल से तस्करी कर चीन का लहसुन साहबगंज मंडी में मंगाया जा रहा है। रोजाना करीब 10 से 12 टन चीन का लहसुन थोक मंडी में खपाया जा रहा है। यहां से शहर के रूस्तमपुर, मोहद्दीपुर, पादरी बाजार, झारखंडी आदि फुटकर सब्जी मंडी में चीन के लहसुन बिक्री हो रही है। देखने में चमकदार इस लहसुन की कीमत 280 से 300 रुपये है। महेवा मंडी के व्यापारी मो. साजिद ने बताया कि हम लोग चीन से आ रहे लहसुन की बिक्री पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। इससे हम लोगों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। प्रदेश के कई जिलों में विरोध हो रहा है। अगर प्रशासन ने रोक नहीं लगाई तो आंदोलन किया जाएगा। इसे लेकर व्यापारियों में वार्ता चल रही है। उधर, मंगलवार को मंडी सचिव प्रवीन अवस्थी ने कार्रवाई के लिए दो सदस्यीय टीम गठित कर दी है।
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चीन के लहसुन की बिक्री की जांच के लिए मंडी से दो सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। जांच में अगर चीन का लहसुन मिला तो संबंधित व्यापारी पर कार्रवाई की जाएगी।
-प्रवीन अवस्थी, मंडी सचिव, महेवा थोक मंडी



सतर्क रहें...चीन का लहसुन पतला कर देगा खून

आयुर्वेद चिकित्सकों के अनुसार अधिकतम 10 ग्राम प्रतिदिन ही खाना चाहिए लहसुन

हाइब्रिड है चाइनीज लहसुन, सेहत पर इसका नुकसान अधिक है
अमर उजाला ब्यूरो

गोरखपुर। गोरक्षनगरी में हर दिन करीब 15 टन लहसुन की खपत हो रही है। इसमें यहां पैदा होने वाले देसी किस्म के अलावा केमिकल से उगायागया चीन का लहसुन भी शामिल है। आयुर्वेद के विशेषज्ञ इस लहसुन को सेहत के लिए हानिकारक बता रहे हैं। लहसुन की संतुलित मात्रा जहां जीवन रक्षक है, वहीं इसकी अधिक मात्रा खून को इतना पतला कर देती है कि वह स्वयं ही शरीर से बाहर आने लगता है। बवासीर समेत कई बीमारियों में इसका कुप्रभाव अधिक होता है। इसलिए सेहत के लिए फायदेमंद लहसुन की एक से दो कली ही एक दिन में खाइए, अन्यथा गंभीर रूप से बीमार पड़ सकते हैं।
पूर्वांचल वालों को लहसुन का स्वाद खूब भाता है। शाकाहारी या मांसाहारी खाने की तो छोड़िए, यहां तो चने के छोला में लहसुन की गांठ खाई जाती है। एम्स में डायटिशियन डॉ. सुधा राजपूत बताती हैं कि लहसुन को आयुर्वेद में औषधि का दर्जा दिया गया है। इसमें एलिसिन नाम का तत्व होता है, जो क्लाटिंग रोकता है। यह हार्ट अटैक और लकवा को की आशंका को कम करता है। अगर लहसुन अधिक खाते हैं तो यही एलिसिन खून को पतला कर देता है, जिससे शरीर के अन्य हिस्सों से खून बहने की दिक्कत हो सकती है।
इसके अलावा सीने व पेट में जलन, पेट दर्द का कारण भी बन सकता है। व्यापारियों का कहना है कि जिले में हर दिन करीब 15 टन लहसुन की खपत हो रही है। इसमें भी चीन के लहसुन की मात्रा अधिक है। लहसुन की डिमांड अब पूरे साल बनी रहती है।


चीन के लहसुन की जांच बहुत जरूरी

आयुर्वेद कॉलेज के द्रव्य गुण विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गिरीधर वेदांतम कहते हैं कि देसी लहसुन अपने सुगंध के चलते ही आसानी से पहचान लिया जाता है। जबकि, चीन के लहसुन की कलियां मोटी और बड़ी होती हैं। यह एक हाइब्रिड है। चूंकि चीन के लहसुन ठंडे वातावरण में केवल केमिकल के बल पर पैदा होते हैं, इसलिए इसमें लहसुन के प्राकृतिक गुण नहीं मिलेंगे। इसको खाने से यहां के लोगों के सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। अपने क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में लहसुन होता है, इसलिए लोगों को स्थानीय स्तर पर उत्पादित लहसुन का ही प्रयोग करना चाहिए।
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दवा के रूप में शुरू हुई, स्वाद ने बिगाड़ी आदत

आयुष विशेषज्ञ डॉ. विनय कुमार सिंह बताते हैं कि लहसुन का प्रयोग पहले दवा के रूप में हुई। यह वातनाशक होता है। इसके खाने से जोड़ों का दर्द ठीक रहता है। पेट की अग्नि को प्रदिप्त करता है, जिससे खाना पचने में आसानी होती है। कॉलेस्ट्राल को भी कंट्रोल में रखता है। इसके गुणों के कारण ही इसका प्रयोग सब्जी में मसाला के तौर पर किया जाने लगा। अब तो मांसाहारियों का हर खाना ही इससे बनता है। वहां भी इसका प्रयोग इसीलिए होता कि इससे स्वाद के साथ-साथ हाजमा भी दुरुस्त रहता है। लेकिन, किसी भी वस्तु का आवश्यकता से अधिक प्रयोग दुरुपयोग की श्रेणी में आता है और जब किसी का दुरुपयोग होता है तो वह नुकसानदायक बन जाता है।
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