मेडिकल कॉलेज में बाबा राघवदास की मूर्ति के सामने ही भाई-बहन को गिराकर पीटते रहे जूनियर डाॅक्टर
पुलिस व सुरक्षा गार्ड बने रहे मूकदर्शक, वीडियो बना रहे युवक को भी पीटा
पिट रहे भाई-बहनों को बचाने नहीं आया कोई आगे
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बाबा राघवदास की जिस मूर्ति के सामने मंगलवार की सुबह जूनियर डॉक्टर वी वांट जस्टिस की मांग कर रहे थे, वहीं दोपहर में उन्होंने एक निरीह युवक और उसकी दो बहनों को जानवरों की तरह पीटा। जूनियर डॉक्टरों ने इस घटना का वीडियो बना रहे एक अन्य युवक को भी पीटा और उसका मोबाइल छीनकर डिलीट कर दिया। अगल-बगल खड़े लोगों को भी गाली देकर भगाया। हर तरफ सफेद वर्दी के खौफ का मंजर था और लोग इधर-उधर भागते रहे।
घटना के वक्त दो सिपाही वहां पहुंच गए थे, लेकिन पिट रहे भाई-बहनों को बचाने के बजाय वे खुद किनारे हाे गए। एक एसआई के साथ भी धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद थाना प्रभारी पहुंचे और किसी तरह से भीड़ को गेट से हटवाया। जूनियर डाॅक्टरों के इस रूप को देख मरीज व तीमारदार इधर-उधर भागने लगे। दूर-दराज से आए मरीजों का कहना था कि यहां आकर मार खाने से अच्छा है कि बिना इलाज कराके ही रहा जाए।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर व एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्रों के उत्पात मचाने की कहानी नई नहीं है। अभी पिछले महीने ही बिरयानी की एक दुकान पर मारपीट में इनका नाम सामने आया था। उससे पहले एक मेडिकल स्टोर के सामने स्कूटी खड़ी करने को लेकर हुए विवाद में दुकान में तोड़फोड़ की थी। वार्ड के अंदर तो अगर किसी मरीज या तीमारदार ने गलती से भी काेई बात कह दी तो उसे या तो बिना इलाज के वहां से भगा देंगे या फिर उनके साथ मारपीट होगी ही।
पिछले साल संतकबीरनगर जिले के एक मरीज का वेंटीलेटर केवल इसलिए बंद कर दिया गया था कि उसके रिश्तेदार ने इलाज के बाबत कोई जानकारी मांग ली थी। उस रिश्तेदार को भी पीटा गया। तीसरे दिन मरीज की इलाज के अभाव में मौत हो गई थी।
मंगलवार दोपहर करीब एक बजे मेन गेट के सामने बाबा राघवदास की मूर्ति के पास कुछ जूनियर डॉक्टर खड़े होकर बात कर रहे थे। इसी दौरान गायनी वार्ड की तरफ से बस्ती जिले के भाई-बहन निकले। उनकी भी जूनियर डॉक्टर्स से कहा सुनी हो रही थी। उनका कसूर इतना था कि एक मरीज के साथ हुई अभद्रता की एक लड़की ने फोटो बना ली थी। इस पर सारे जूनियर डॉक्टरों ने मिलकर भाई-बहनों को सड़क पर गिराकर मारना शुरू कर दिया। लड़कियां अपने भाई को बचाने के लिए चीख रही थीं, लेकिन जूनियर डॉक्टरों पर इसका कोई असर नहीं हो रहा था।
तमाशबीन बनी रही भीड़
जिस वक्त घटना हुई मौके पर 50 से अधिक लोग तमाशबीन थे। कोई छत से भाई-बहनों को पिटता देख रहा था तो कोई चहारदीवारी पकड़कर खड़ा था। मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा के लिए लगाई गई फोर्स पिट रहे भाई-बहनों को बचाने या जूनियर डॉक्टरों की इस गुंडई को रोकने के बजाय भीड़ को वहां से हटवाने में लगी थी। वे बार-बार माइक से लोगों से वहां से हटने की अपील कर रहे थे। पुलिसकर्मी भी डॉक्टरों के सामने असहाय दिखे।
अंदर भी मची रही अफरा-तफरी
हंगामे की शुरुआत गायनी वार्ड के पास से हुई। जूनियर डॉक्टरों ने तीमारदार को पीटा तो उसने एक स्ट्रेचर पर रखे ऑक्सीजन सिलिंडर को खींच लिया। इससे वहां खड़े मरीज व कर्मचारी इधर-उधर भाग निकले। इस बीच मौका पाकर युवक और उसकी बहन इमरजेंसी गेट की तरफ से तेजी से बाहर निकलने लगे। तब तक पीछे से जूनियर डॉक्टरों ने फिर दौड़ाकर भाई-बहनों को पकड़ लिया और घसीटते हुए गेट तक ले गए। अन्य वार्डों में इलाज के दौरान मारपीट व हंगामा की सूचना फैली तो तमाम लोग बाहर आ गए।
यहां आकर मार खाने से अच्छा है कि आएं ही नहीं
साइकिल स्टैंड के पास अपनी बेटी व पत्नी के साथ सहमे खड़े महराजगंज के मिठौरा निवासी रामवृक्ष प्रजापति घटना देख हतप्रभ थे। उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि एक युवक को पीट रहे आठ-दस लोग जो डॉक्टरों जैसे दिख रहे थे। थोड़ी देर बातचीत के बाद सहज हुए रामवृक्ष ने बताया कि वह कृषि विभाग से सेवानिवृत्त हैं। बेटी को कुछ दिक्कत थी तो पत्नी के साथ यहां इलाज कराने आए थे। अभी गेट के पास पहुंचे ही थे कि मारपीट की यह घटना हो गई। उनका कहना था कि भाई साहब! डॉक्टर शब्द सुनते ही एक ऐसे पढ़े लिखे व्यक्ति की छवि दिमाग में बनती है, जिनका व्यवहार सौम्य होता है। उनके बोलने, कपड़े पहनने, बाल तक दूसरों के लिए आदर्श होते हैं, लेकिन जो लड़के सफेद कपड़ों में दिख रहे थे, उनकी भाषा और व्यवहार सड़क छाप था। पत्नी सावित्री ने पति की बात का समर्थन करते हुए कहा कि यहां आकर पिटने से अच्छा है कि अपने घर बिना इलाज कराए ही आदमी मर जाए। मान लिया कि इन्होंने कोई गलती ही कर दी होगी, तो उसके बदले इस तरह इन्हें जानवरों जैसा पीटना कहां का न्याय है। आखिर मार खाए भाई-बहन भी किसी की संतान हैं। डॉक्टरों के भय से इस दंपति ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने का विचार बदल दिया और वे किसी निजी अस्पताल की तरफ निकल गए।
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एक पखवाड़े में ही एमबीबीएस छात्र भूल गए सीएम का संदेश
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ही कार्यक्रम में सीएम ने आचरण ठीक रखने का दिया था सुझाव
गोरखपुर। अभी तीन अगस्त को ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज में विकास कार्यों के शिलान्यास, लोकार्पण और एमबीबीएस छात्रों के मोबाइल वितरण कार्यक्रम के दौरान अच्छे चाल-चलन की नसीहत दी थी। सीएम ने यहां तक कहा था कि मारपीट की घटनाओं से लोगों के मन में डॉक्टरों की डिग्री को लेकर आशंका पैदा होती है। अस्पताल आए मरीज की मन:स्थिति ऐसी नहीं होती है कि वह धैर्य दिखा सके, लेकिन डॉक्टर से यह अपेक्षा की जाती है कि वह धैर्य के साथ मरीज का उपचार करें, लेकिन सीएम की इन बातों को जूनियर डॉक्टरों ने शायद उसी दिन अनसुना कर दिया था। तभी तो महज 10 दिन बाद ही बीच सड़क पर ऐसी हरकत कर दी कि खुद कॉलेज प्रशासन को भी झेंपना पड़ा।
प्रधानाचार्य की सख्ती के बाद दोनों पक्ष में हुआ समझौता
घटना की सूचना वाराणसी ट्रेनिंग में गए प्रधानाचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल को मिली तो उन्होंने तुरंत ही आरोपी जूनियर डॉक्टरों की पहचान कर सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके बाद प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. पवन प्रधान ने भी आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की बात कही। कॉलेज प्रशासन की तरफ से सख्ती की चेतावनी देने पर जूनियर डॉक्टरों ने पहले यह कहा कि आरोपियों ने ऑक्सीजन सिलिंडर का लॉक तोड़कर आगे लगाने की कोशिश की। प्रभारी प्रधानाचार्य ने पूछा कि आखिर सड़क पर उतरकर मारपीट करने की नौबत क्यों आई। अगर ऑक्सीजन सिलिंडर का लॉक तोड़ा था तो उसे उसकी सजा दी जाती, लेकिन मारने का अधिकार किसने दिया। देर शाम पीड़ितों और आरोपियों को एक साथ बैठाकर मामले में समझौता करा दिया गया।
पूरे प्रकरण की जानकारी है। जूनियर डॉक्टर हों या कोई अन्य कर्मचारी, अगर ऐसी हरकत कर कॉलेज व अस्पताल की छवि खराब करने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ अब कानूनी कार्रवाई होगी। इस मामले में आरोपी जूनियर डॉक्टरों को पीड़ित पक्ष के सामने बैठाकर बात कराई गई। दोनों पक्ष के बीच समझौता हो गया है। जूनियर डॉक्टरों को चेतावनी दी गई है कि दोबारा ऐसा होने पर कोई रियायत नहीं दी जाएगी।
- डॉ. रामकुमार जायसवाल, प्राचार्य बीआरडी मेडिकल कॉलेज