संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। समाज को बड़ा संदेश देने के लिए कविता से बेहतर माध्यम कोई नहीं है। कविताएं भावनाओं की अभिव्यक्ति हैं। यह बातें गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने मंगलवार को दीक्षांत सप्ताह के तहत आयोजित काव्य को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कहीं।
काव्य गोष्ठी में प्रसिद्ध कवियों के साथ विश्वविद्यालय के कई होनहार कवि छात्रों को भी कविता सुनाने का मौका दिया गया। कविता पाठ की शुरुआत गोष्ठी की सबसे नन्हीं कवि कनिष्का ने देशभक्ति कविता से की। कवयित्री चारू सिंह ने गोष्ठी की शुरुआत सरस्वती गीत ''''''''शारदे मां मुझे ऐसा वर दे मेरा हर दिन तू त्योहार कर दें'''''''' से की। युवा कवियों की श्रृंखला में मोनिका ने संस्कृत में काव्य पाठ, महमूद रजा ने नात विधा की प्रस्तुति की।
साथ ही संस्कृत विभाग की अपर्णा, प्राणी विज्ञान की नंदिनी सिंह स्नातक के छात्र दीपक और सिद्धेश्वर ओझा, विधि विभाग के लक्ष्मी सागर, हिंदी विभाग के अवनीश मौर्या, पत्रकारिता के छात्र सुधांशु सिंह, शोध छात्र हर्षित ने कविता पाठ किया।
वसीम अजहर ने मेरा हिंदुस्तान नज्म से सभागार में सभी को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। आकृति विज्ञा अर्पण ने अपनी नई कविता ''''''''सुनो बसंती हील उतारो'''''''' से महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। डॉ. चारू शीला सिंह ने श्रृंगार की कविता से महफिल लूट ली।
प्रख्यात शायर सरवत जमाल ने उर्दू शायरी, नुसरत अतीक ने पारिवारिक कविता, चेतना पांडेय ने ''''''''इस युग ने कहा औरत को देवी'''''''' का काव्य पाठ किया। सुभाष यादव ने विश्व प्रसिद्ध कविता ''''''''केहू केतनो दुलारी लेकिन माई ना होई'''''''' नामक कविता से सभी को मातृ भावनाओं से भाव-विभोर कर दिया। जय प्रकाश नायक ने ''''''''एक जैसे रहे एक जैसे रहे और में तो घबरा गया है नदी देखकर'''''''' नामक की कविता का पाठन किया।
गोष्ठी की अंतिम कविता ''''''''मेरी कविताओं पर ताली न बजाओ'''''''' देवेंद्र आर्य के द्वारा सुनाई गई । स्वागत संयोजक प्रो. राजेश मल्ल ने किया। उर्दू विभाग के प्रो. साजिद हुसैन ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर कुलसचिव प्रो. शांतनु रस्तोगी, प्रो. नंदिता सिंह, प्रो. दीपक प्रकाश त्यागी, प्रो. अनिल कुमार राय, प्रो. बिमलेश कुमार मिश्र, प्रो. कमलेश कुमार गुप्त आदि मौजूद रहे।