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ग्लूकोमा बन रही परेशानी: ध्यान दें! आंखों पर पड़ने वाले तनाव से कम हो रही आंखों की रोशनी- बरतें ये सावधानियां

Sat, 04 Jan 2025 04:14 PM IST
रोहित सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर

सार

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ पंकज सोनी के निर्देशन में डॉ प्रियंका ने शोध किया है। शोध में 18 साल से ऊपर के 70 ऐसे मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें पहले से ही समलबाई की बीमारी थी। उनका इलाज भी हुआ, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हो रहा था।
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डॉ पंकज सोनी के निर्देशन में डॉ प्रियंका ने शोध पूरा किया - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में 70 मरीजों पर किए गए शोध में यह बात सामने आई है कि ग्लूकोमा (समलबाई) की वजह से जलीय द्रव (आंख का पानी) का संतुलन खराब हो रहा है। इससे आंख में हमेशा दर्द रहता है। धीरे-धीरे इसकी वजह से नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। फिर आंखों की रोशनी खत्म हो जाती है। इस बीमारी का समय रहते इलाज होने पर कुछ हद तक आंखाें की रोशनी को बचाया जा सकता है।

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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ पंकज सोनी के निर्देशन में डॉ प्रियंका ने शोध किया है। शोध में 18 साल से ऊपर के 70 ऐसे मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें पहले से ही समलबाई की बीमारी थी। उनका इलाज भी हुआ, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हो रहा था। इन मरीजों की जांच में पाया गया कि आंख के अंदर के दबाव में असंतुलन के कारण जलीय द्रव (एक्वस ह्यूमर) निकल नहीं पा रहा था।

इसकी वजह से आंख में हमेशा दर्द और तनाव रहता था। इससे आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम हो रही थी। इन मरीजों की ट्रैबेक्यूलेक्टोमी सर्जरी कर यह पता लगाया कि इनकी आंखों की रोशनी को कितना बचाया जा सकता है। सर्जरी के बाद इन मरीजों की खोई हुई रोशनी तो वापस नहीं आई, लेकिन बची हुई को सुरक्षित करने में सफलता मिली।
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साथ ही आंखों में तनाव कम होने से दर्द भी नहीं रहा। डॉ. प्रियंका ने बताया कि आंख के अंदरूनी हिस्से में विभिन्न अवयवों काे संतुलित रखने के लिए प्राकृतिक रूप से एक द्रव मौजूद होता है। यही द्रव आंख का संतुलन बनाता है, लेकिन ग्लूकोमा के चलते यह एक जगह पर एकत्रित हो जाता है। इससे आंख में एक तरफ दबाव बढ़ने लगता है। इससे दर्द शुरू हो जाता है।

पानी आंखों से बाहर नहीं निकल पाता, जिसके कारण आंखों का तनाव (इंट्राऑक्यूलर प्रेशर) बढ़ता जाता है, जो आंखों की नसों को नष्ट करता है। इस कारण ही आंखों की रोशनी जाने लगती है। इसीलिए ग्लूकोमा को साइलेंट किलर ऑफ विजन भी कहा जाता है। प्रारंभिक चरणों में ग्लूकोमा के लक्षण नजर नहीं आते। आमतौर पर इसके कारण साइड विजन (पेरिफेरल विजन) सबसे पहले प्रभावित होता है।

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