गोरखपुर में त्योहार अब बाजार के हवाले है और बाजार ब्रांड वैल्यू पर चल रहा है। होली को ही देख लीजिए। बाजार में पिचकारी, टोपी, टी-शर्ट सब किसी न किसी ब्रांड के सहारे है। बाजार की इस चाल को राजनीतिक दलों ने भी समझ लिया है। ऐसे में उन्होंने त्योहार के सहारे अपने ब्रांड को हर घर तक पहुंचाने का हथियार बना लिया है।
दो साल से बाजार में डबल इंजन वालों (भाजपा सरकार) का सिक्का चल रहा है। इस साल उनके नेताओं के नाम की पिचकारी खूब बिकी है। वहीं विपक्षी दलों के नेताओं की ब्रांडिंग कमजोर है। दिवाली पर छाया रहने वाला झाड़ू भी होली के बाजार से गायब है।
होली पर करोड़ों रुपये का कारोबार हुआ है। मिठाई, रंग, अबीर, कपड़े आदि की बिक्री खूब हो रही है। कुछ साल पहले तक ये सामान कंपनियों के नाम से बिकते थे, लेकिन अब कंपनियों को भी अपना सामान बेचने के लिए किसी न किसी अन्य चर्चित ब्रांड का सहारा लेना पड़ रहा है।
अगर मौसम खेल का है तो स्टार खिलाड़ियों के नाम पर राख भी सोने के भाव बिकती है। वहीं चुनावी समर में सबसे बड़ा ब्रांड वैल्यू नेताओं का है। रंग-गुलाल, पिचकारी के विक्रेता जयप्रकाश और विजय कुमार को मार्केट का चढ़ाव-उतराव देखते पांच दशक बीत गए हैं। वे बताते हैं-मार्केट में अब हर सामान किसी न किसी चर्चित चेहरे के नाम पर बिक रहा है।
मार्केट ऐसे चहरों को पहले ही भांप लेता है कि किसके नाम पर इस साल सामान बेचा जा सकता है। अब दिवाली और होली की तुलना करेंगे, तो दोनों में अलग-अलग ब्रांड वैल्यू नजर आएगी। इसका लोगों की सोच पर भी असर पड़ता है। आप देखें कि अगर तेज आवाज वाला पटाखा होगा तो उस पर बाबा (सीएम योगी आदित्यनाथ) की छवि दिखेगी।
समाजशास्त्री डॉ प्रमोद कुमार शुक्ला ने बताया कि आज मीडिया सबसे प्रभावी माध्यम है। किसी नेता-अभिनेता की जैसी छवि गढ़ी जाती है, समाज भी उन्हें उसी रूप में स्वीकार करता है। बाजार भी अब उसी छवि को भुनाने में लगा है। हर दिन नए-नए ट्रेंड बाजार में आ रहे हैं। भीड़ की भेड़चाल का फायदा कभी बाजार उठाता है तो भी फिल्मी कलाकार और कभी राजनीतिज्ञ। इसी बाजार के सहारे समाज भी बदल रहा है।