बघराई स्थित गोविंद हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन नहीं था। प्रसूता की मौत के बाद से संचालक और डॉक्टर भागे हुए हैं। मंगलवार को हॉस्पिटल का शटर गिरा रहा और बोर्ड उतार दिया गया। प्रसूता के पति की तहरीर पर मंगलवार को हॉस्पिटल संचालक, डॉक्टर समेत छह पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया।
रविवार को गोहली बसंत की रेनू देवी को ऑपरेशन से हॉस्पिटल में बेटा पैदा हुआ। इसके बाद हालत बिगड़ने पर संचालक और डॉक्टर सोमवार सुबह कार से उसे लेकर दूसरे हॉस्पिटल जा रहे थे। तभी रास्ते में उसकी मौत हो गई। इसके बाद संचालक व डॉक्टर उसे छोड़कर भाग गए।
पति दिनेश कुमार चौहान बांसगांव थाने पहुंचकर संचालक, डॉक्टर और आशा समेत छह पर आरोप लगाते हुए बांसगांव थाने में तहरीर दी थी। दिनेश कुमार चौहान ने पुलिस को बताया कि उनकी पत्नी रेनू गर्भवती थीं। रविवार को प्रसव पीड़ा होने पर वह गांव की आशा को सूचना दी।
आशा ने शाम साढ़े चार बजे एंबुलेंस से पत्नी को सीएचसी बांसगांव भिजवाया। जहां भर्ती कर उसका उपचार हुआ लेकिन हालत में सुधार नहीं होने से शाम छह बजे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। आशा ने सस्ते में उपचार कराने का झांसा देते हुए पत्नी को निजी हास्पिटल में भर्ती करा दिया।
यहां पर तैनात डॉक्टर और संचालक ने रात के समय ऑपरेशन किया। एक बेटे का जन्म हुआ। इसके बाद उसकी हालत गंभीर होने लगी और उसकी मौत हो गई।
हॉस्पिटल का नहीं कराया गया है रजिस्ट्रेशन
इस संबंध में सीएचसी बांसगांव के अधीक्षक एमके अग्रवाल ने बताया कि बघराई में चल रहे गोविंद हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन स्वास्थ्य विभाग से नहीं कराया गया है। यह अवैध ढंग से संचालित हो रहा था। क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता कमीशन के चक्कर में महिला रोगियों को निजी अस्पताल पहुंचा रही हैं।
बैठक में उन्हें हर बार ऐसा नहीं करने की हिदायत दी जा रही है। सीएचसी में तैनात स्टाफ नर्स प्रिया ने बताया कि रेनू का प्लेटलेट्स लगातार गिर रहा था। इसलिए जिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया था।