बड़हलगंज में सरयू नदी पर बने गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन के पुल को सुरक्षित करने के लिए एनएचएआई की तरफ से बचाव कार्य शुरू करा दिए गए हैं। रविवार को पुल के एप्रोच के पास बोल्डर गिराने का काम शुरू हुआ। इसके साथ ही पिलरों के चारों तरफ भी बोल्डर का घेरा (एबाटमेंट) बनाया जाएगा। इसी सप्ताह सिंचाई विभाग को भी धारा सीधी करने का प्रस्ताव भेजा जाएगा।
सरयू नदी की धारा इस बार अपस्ट्रीम (गोरखपुर की तरफ) में कटान कर रही है। बीते दिसंबर में लिंक एक्सप्रेस-वे पर कम्हरियाघाट के पास कटान के चलते नदी सड़क के नजदीक पहुंच गई। इससे एक लेन धंसने लगा तो वहीं पुल की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई थी। इसकी वजह से सड़क पर आवागमन रोककर तत्काल बचाव कार्य शुरू कराया गया। वहां 200 करोड़ रुपये से धारा सीधी करने के साथ ही पुल के पास बोल्डर पिचिंग हो रहा है।
इसके बाद फरवरी में नदी ने गोरखपुर-वाराणसी हाईवे पर बड़हलगंज के पास बने नए पुल के पास कटान शुरू कर दिया। पुल के छठवें पिलर के पास धारा दो हिस्से में बंटी और बीच में सिल्ट जमा होने लगा। सिल्ट से टकराने के बाद धारा चौथे-पांचवें पिलर के बीच आ गई। इससे पानी एप्रोच की तरफ बढ़ने लगा।
आशंका जताई गई कि अगर बरसात में जलस्तर बढ़ा और यही हालात रहे तो पुल के एप्रोच पर खतरा बढ़ जाएगा, क्योंकि उसके पास बोल्डर पिचिंग नहीं है।
दिल्ली से आए एनएचएआई के विशेषज्ञों ने धारा मुड़ने से पुल को बचाने के लिए बोल्डर पिचिंग का सुझाव दिया है। इसके अलावा धारा को सीधी करने का प्रस्ताव है। धारा सीधा करने के लिए सिंचाई विभाग के बाढ़ खंड डिवीजन की मदद ली जाएगी। इससे पहले एनएचएआई की तरफ से पुल के एप्रोच व पिलर के पास बोल्डर पिचिंग का काम शुरू करा दिया गया है।
एनएचएआई के अफसरों ने बताया कि अभी जिन पिलर तक पानी नहीं पहुंचा है, वहां चारों तरफ से बोल्डर का घेरा (एबाटमेंट) बनाया जाएगा। इससे कटान होने पर भी पिलरों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचेगा। वहीं एप्रोच के चारों तरफ भी बोल्डर पिचिंग कराई जाएगी, ताकि बरसात में पुल की मजबूती बनी रहे। रविवार को एनएचएआई के परियोजना निदेशक के निर्देश पर बोल्डर पिचिंग का काम शुरू भी करा दिया गया।
पुल को बचाने के लिए बोल्डर पिचिंग और धारा को सीधी करने का सुझाव मिला है। इस क्रम में पिलर व एप्रोच के पास बोल्डर पिचिंग का काम तत्काल प्रभाव से शुरू करा दिया गया है। धारा को सीधी करने का प्रस्ताव सिंचाई विभाग को इसी सप्ताह भेजा जाएगा:
ललित पाल, परियोजना निदेशक, एनएचएआई