स्पेशल रिपोर्ट (एसआर) केस में हिंसक अपराध की एक श्रेणी है, जैसे हत्या, दुष्कर्म, लूट, डकैती आदि। इस केस की माॅनिटरिंग जिला पुलिस ऑफिस के अलावा सभी आला अफसर यहां तक की डीजीपी तक से होती है। समय-समय पर इसकी समीक्षा भी की जाती है। कोई भी नया अफसर आता है तो जिले में होने वाले अपराध को जानने के लिए एसआर फाइल को जरूर देखता है। अभी सिर्फ परंपरागत केस ही इसमें दर्ज किए जाते थे, लेकिन एसएसपी ने पहली बार अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर पहले केस को एसआर घोषित कर दिया है।
रुद्रांश ने फर्जी बैनामा से नगर निगम में दर्ज कराया था नाम
गोरखपुर। रुद्रांश ने नगर निगम में फर्जी बैनामा के आधार पर अपना नाम दर्ज कराया है। अपर नगर आयुक्त निरंकार सिंह ने बताया है कि रुद्रांश की नगर निगम में कोई गहरी पैठ नहीं है, बल्कि पंजीकृत बैनामा के आधार पर क्रेता नगर निगम एसेसमेन्ट रजिस्टर में अपना नाम अंकित करा सकता है। जब तक पंजीकृत बैनामा किसी सक्षम न्यायालय से निरस्त नही किया जाता, जब तक पंजीकृत बैनामे के कानूनी प्रभाव से इन्कार नहीं किया जा सकता।
इसके अतिरिक्त नगर निगम में सिर्फ टैक्स की अदायगी के लिए असेसमेन्ट रजिस्टर में क्रेता का नाम अंकित किया जाता है, एसेसमेन्ट रजिस्टर में नाम दर्ज होने से स्वामित्व की पुष्टि नहीं होती है। यदि पंजीकृत बैनामा कूट रचित है तो क्षुब्ध पक्ष, सक्षम न्यायालय से उक्त बैनामे को निरस्त कराकर, नगर निगम को साक्ष्य सहित सूचित करें, तब नगर निगम उक्त निरस्त बैनामे के आधार पर नगर निगम में अंकित नाम को खारिज करने की कार्रवाई करेगा, जब तक पंजीकृत बैनामा निरस्त नहीं हो जाता जब तक उसका कानूनी प्रभाव बरकरार रहता है।
एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए केस को एसआर घोषित करने का निर्णय लिया गया है। पूरे प्रकरण की एसआईटी गंभीरता से जांच कर रही है। जांच और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।