गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. राजवंत राव ने कहा कि कलाकृति एक कोड है, हर दर्शक अपनी दृष्टि से उसकी व्याख्या करता है। भारतीय चित्रकला की परंपरा पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि समय के साथ कला की अभिव्यक्ति के रूप बदले हैं, लेकिन उसकी सांस्कृतिक चेतना आज भी कलाकृतियों में दिखाई देती है। वह शुक्रवार को अमृता कला वीथिका में राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश और विश्वविद्यालय के ललित कला एवं संगीत विभाग की ओर से आयोजित ‘कला आचार्य’ चित्रकला प्रदर्शनी के शुभारंभ अवसर पर बोल रहे थे। विभागाध्यक्ष प्रो. अनुभूति दुबे ने कहा कि कुलपति प्रो. केपी सिंह के मार्गदर्शन और राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा के सहयोग से प्रदर्शनी का आयोजन संभव हुआ।