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BRD के डॉक्टरों ने किया कमाल: टीबी ने छीन ली थी आंखों की रोशनी, साढ़े तीन दशक पुरानी विधि से लौटी वापस

Fri, 16 Jun 2023 02:19 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।

सार

न्यूरो मेडिसिन डॉ. सुमित की जांच में पता चला कि आंखों की नसों में टीबी के माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नाम के बैक्टीरियां ने गांठ बना दी है, जिसकी वजह से आंखों की पुतलियों तक रक्त का संचार नहीं पहुंच हो रहा था। इससे आंख की रोशनी चली गई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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करीब साढ़े तीन दशक पुरानी विधि थेरापीटिक लंबर पंक्चर आंखों की रोशनी लौटाने में कारगर साबित हो रही है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इस विधि से आंख की टीबी बीमारी से ग्रसित एक महिला के आंखों का उपचार किया गया और उसके आंखों की रोशनी 80 फीसदी तक आ गई है।

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टीबी के बैक्टीरिया की वजह से 31 वर्षीय महिला के आंखों की रोशनी पूरी तरह से चली गई थी। इलाज के लिए परिजन बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी में आए।

डॉक्टरों ने जांच शुरू की तो पता चला कि महिला को ट्यूबरक्लोमा ऑप्टोकियास्मैटिक अरचनोइडाइटिस (आंख की टीबी) हो गई। शुरूआती इलाज में सफलता नहीं मिली तो डॉक्टरों ने 1987 की पुरानी तकनीक थेरापीटिक लंबर पंक्चर से इलाज शुरू किया। मरीज के आंखों की रोशनी 80 फीसदी लौट आई है।
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शहर के घंटाघर की रहने वाली सरिता (31) का धीरे-धीरे आंखों से धुंधला दिखाई देने लगा। इस पर उसने शहर के कई डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन कोई राहत नहीं हुई। इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर डॉक्टरों ने जांच के बाद न्यूरो विभाग में दिखाने की सलाह दी।

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सुपर स्पेशियलिटी विभाग के न्यूरो मेडिसिन डॉ. सुमित की जांच में पता चला कि आंखों की नसों में टीबी के माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नाम के बैक्टीरियां ने गांठ बना दी है, जिसकी वजह से आंखों की पुतलियों तक रक्त का संचार नहीं पहुंच हो रहा था। इससे आंख की रोशनी चली गई है। इस गांठ को तोड़ने के लिए पहले चरण में कुछ दवाएं दी गई, लेकिन कोई राहत नहीं हुई। इस बीच डॉ. सुमित ने 1987 के थेरापीटिक लंबर पंक्चर विधि से इलाज करने का फैसला लिया, जो पूरी तरह से सफल रहा है।

रीढ़ की हड्डी में लगता है इंजेक्शन
डॉ. सुमित ने बताया कि थेरापीटिक लंबर पंक्चर तकनीक में रीढ़ की हड्डी में सीएसएफ द्वारा कुल 10 इंजेक्शन लगाए जाते हैं। छह सप्ताह तक इंजेक्शन लगाने का फायदा यह हुआ कि उसके आंखों की रोशनी 80 फीसदी वापस आ गई है। सप्ताह में केवल इंजेक्शन लगता है। अभी चार सप्ताह तक और इंजेक्शन लगाए जाएंगे। सभी 10 इंजेक्शन की कीमत दो हजार रुपये है।

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