सुपर स्पेशियलिटी विभाग के न्यूरो मेडिसिन डॉ. सुमित की जांच में पता चला कि आंखों की नसों में टीबी के माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नाम के बैक्टीरियां ने गांठ बना दी है, जिसकी वजह से आंखों की पुतलियों तक रक्त का संचार नहीं पहुंच हो रहा था। इससे आंख की रोशनी चली गई है। इस गांठ को तोड़ने के लिए पहले चरण में कुछ दवाएं दी गई, लेकिन कोई राहत नहीं हुई। इस बीच डॉ. सुमित ने 1987 के थेरापीटिक लंबर पंक्चर विधि से इलाज करने का फैसला लिया, जो पूरी तरह से सफल रहा है।
रीढ़ की हड्डी में लगता है इंजेक्शन
डॉ. सुमित ने बताया कि थेरापीटिक लंबर पंक्चर तकनीक में रीढ़ की हड्डी में सीएसएफ द्वारा कुल 10 इंजेक्शन लगाए जाते हैं। छह सप्ताह तक इंजेक्शन लगाने का फायदा यह हुआ कि उसके आंखों की रोशनी 80 फीसदी वापस आ गई है। सप्ताह में केवल इंजेक्शन लगता है। अभी चार सप्ताह तक और इंजेक्शन लगाए जाएंगे। सभी 10 इंजेक्शन की कीमत दो हजार रुपये है।