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स्वतंत्रता दिवस: स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास समेटे है नरहरपुर स्टेट किला- दासता नहीं स्वीकारी; सिर कटा लिया

Wed, 14 Aug 2024 01:37 PM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

गोरखपुर में पूर्वांचल में मंगल पांडेय प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के शहीद थे। गोरखपुर जनपद में इसका केंद्र नरहरपुर स्टेट था। यहां के राजा हरिप्रसाद मल्ल ने सिर कटाना पसंद किया लेकिन अंग्रेजों की दासता को स्वीकार नहीं किया। उनका ध्वस्त किला देशभक्ति का इतिहास बन गया है।
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राजा हरिप्रसाद मल्ल - फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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गोरखपुर में पूर्वांचल में मंगल पांडेय प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के शहीद थे। गोरखपुर जनपद में इसका केंद्र नरहरपुर स्टेट था। यहां के राजा हरिप्रसाद मल्ल ने सिर कटाना पसंद किया लेकिन अंग्रेजों की दासता को स्वीकार नहीं किया। उनका ध्वस्त किला देशभक्ति का इतिहास बन गया है।

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हरिप्रसाद मल्ल की कोठी केवल विरासत न रहे बल्कि पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो, इसके लिए शासन ने चार करोड़ 31 लाख रुपये की धनराशि भी स्वीकृत कर दिया है। बड़हलगंज में सरयू नदी के किनारे किले के अवशेष के रूप में मौजूद शहीद स्मारक को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में राजा हरिप्रसाद मल्ल आंदोलन के केंद्र बिंदु बन गए थे। उन्होंने पैना, देवरिया के बाबू कुंवर सिंह के विद्रोह को सही ठहराते हुए गोरी हुकूमत के खिलाफ शंखनाद किया और गोरखपुर से जा रहे अंग्रेजों के राशन को लूटवा लिया। खार खाए अंग्रेज अगल-बगल के देशी राजाओं के सहयोग से उनको कुचलने के लिए प्रयासरत थे।
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राजा भी सजग थे। किले के साथ ही सरयू नदी के जल क्षेत्र में भी सैनिकों की तैनाती कर रखी थी, जो धनुर्विद्या में निपुण थे, जिससे पार पाना मुश्किल था। पैंतरा बदलकर अंग्रेजों ने रात के समय सरयू नदी के पार मऊ जनपद के दोहरीघाट के बहादुरपुर गांव की नीली कोठी में तोप लगाकर उनके किले को ध्वस्त करना शुरू कर दिया।

उनके अत्याधुनिक हथियार के सामने राजा व उनके सैनिक बेबस हो गए। यद्यपि उनके महान त्याग व बलिदान पर राष्ट्रीय इतिहासकारों ने चुप्पी साध रखी है
लेकिन क्षेत्रीय लेखकों ने अपनी कृतियों में अमरता प्रदान किया है। वर्तमान में भी स्थानीय लोग महानायक के त्याग की कथा सुनाकर भावी पीढ़ी को देशभक्ति का पाठ पढ़ाते हैं।

उपेक्षित पड़ा है ध्वस्त किला, बनेगा पर्यटन का केंद्र
गांव में सरयू नदी के तट पर स्थित राजा का ध्वस्त किला उपेक्षित पड़ा हुआ है। किले की दीवारें जीर्ण-शीर्ण होकर गिर रही हैं। किले का अवशेष अब टीला बन गया है। जिस पर घास और जंगली पेड़ उग आए हैं। सरकारें आईं और गई लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।

यह शहीद स्मारक जिले का पांचवां शहीद स्मारक होगा, जिसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना कार्यान्वित होने जा रही है। इससे पहले चौरी चौरा शहीद स्मारक, बाबू बंधु सिंह शहीद स्मारक, डोहरिया कला शहीद स्मारक और बिस्मिल शहीद स्मारक को पर्यटन केंद्र के रूप मेंं विकसित किया जा चुका है।

स्वीकृत धनराशि से पर्यटन विभाग राजा साहब के किले के अवशेषाें को संरक्षित करेगा। साथ ही वहां नदी किनारे घाट, घाट से किले तक पाथ-वे, पार्क, टायलेट ब्लाक आदि बनवाएगा। वहां राजा साहब की एक आदमकद प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी। पर्यटक वहां पहुंचकर देश के लिए बलिदान होने वाले इस महापुरुष को श्रद्धांजलि दे सकेंगे, उनके बलिदान को याद कर सकेंगे।


 

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