हम वेदों से निकली शिक्षा और संस्कृति की जिन परंपराओं को लेकर चले थे, आज उसमें जहां कहीं भी विकृतियां आई हैं, उनमें सुधार हमारी जिम्मेदारी है। इसके अलावा भारतीय शिक्षा व्यवस्था को सुधारा जाए और फिर से उस परंपरा को पूरे देश में प्रवाहित करने का एक अभियान चलाए जाने की भी जरूरत है।
यह बातें गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग आचार्य व शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के प्रान्त अध्यक्ष प्रो. विनय सिंह ने कहीं। मौका, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास गोरक्ष प्रांत की तरफ से न्यास के स्थापना दिवस के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर स्थित महायोगी गुरु गोरखनाथ योग संस्थान में आयोजित कार्यक्रम का था।
बतौर मुख्य वक्ता प्रो सिंह ने कहा कि कि न्यास इन्हीं उद्देश्यों को लेकर विगत 20 वर्षों से निरंतर संघर्षरत है। वर्तमान में न्यास 11 विषयों, तीन कार्य विभागों, तीन आयामों तथा दो अभियानों को लेकर देश भर संगठनात्मक स्तर पर 28 प्रान्तों एवं समस्त केंद्र शासित प्रदेश में कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि देश के सभी शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को क्रियान्वित करने के लिए न्यास अभियान के माध्यम से विभिन्न संगोष्ठियों का आयोजन करके इसको मूर्त रूप दे रहा है।प्रो सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत बनने के लिए न्यास अभियान चलाकर देश के युवाओं को दिशा देने का कार्य कर रहा है।
न्यास के प्रांत संरक्षक मनकेश्वर नाथ पांडेय ने कहा कि डॉ॰ दीनानाथ बत्रा व डॉ॰ अतुल भाई कोठारी ने वर्ष 2004 में आज ही के दिन जिस कार्य को प्रारंभ किया था, उसी कार्य को एक अभियान का रूप देते हुए आज पूरा देश उसके साथ जुड़ चुका है।
इस दौरान बृजेश मणि मिश्र, प्राचार्य डॉ विनय कुमार मिश्र, डॉ प्रांगेश कुमार मिश्र, डॉ अभिषेक पांडेय, डॉ रोहित मिश्र, डॉ अशोक शाही, डॉ॰ संजय तिवारी, डॉ राम प्रभाकर द्विवेदी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।