एम्स ऋषिकेस में तैनाती के समय कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर ने अपने बड़े बेटे की तैनाती कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन डिपार्टमेंट (सीएमएफएम) में करवाई थी। निदेशक गोरखपुर एम्स बनने के बाद उन्होंने बेटे की भी यहीं तैनाती करवा दी। छोटे बेटे की एमबीबीएस डिग्री पूरी करने के बाद इंटर्नशिप करने के दौरान ही एम्स गोरखपुर में नियुक्ति करवाई। यही उन्हें भारी पड़ा। यहीं से डॉक्टरों के एक धड़े ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। नर्सिंग हॉस्टल निर्माण में मनमर्जी और इसी बीच एक रविवार के दिन ओपीडी खोलने के आदेश ने तो कार्यकारी निदेशक के खिलाफ माहौल बना दिया।
हालांकि, एम्स की कार्यकारी निदेशक के प्रभाव के चलते कोई खुलकर सामने नहीं आया। इसी बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, गोरखपुर हिंदुस्तान उर्वरक केंद्र के उद्घाटन के पहले निरीक्षण के लिए गोरखपुर आए थे। एम्स सूत्र ने बताया कि इसके लिए शनिवार को मीटिंग बुलाकर कार्यकारी निदेशक ने रविवार को ओपीडी शुरू करने की बात रखी। सभी चिकित्सकों ने इसपर असहमति जताई और तर्क दिया कि रविवार को एम्स की ओपीडी पहले दिल्ली एम्स में शुरू करवाएं। पूरे देश में किसी भी एम्स में रविवार को ओपीडी नहीं चलती है।
बैठक में सहमति बनी कि मंत्री को एम्स का निरीक्षण करवाया जाएगा। चिकित्सक ओपडी में बैठेंगे भी, लेकिन मरीज नहीं देखेंगे। इसी के बाद लगातार एक के बाद एक फैसलों से नाराज एम्स के ही विरोधी खेमे ने इनके सभी फैसलों और मनमाने तरीके से बेटों की तैनाती की शिकायत सीवीसी से कर दी।